ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची ने आठ साल बाद अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के दौरे पर पहुंचे हैं। जहां उन्होंने कई तालिबानी अधिकारियों से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने हेलमंद नदी जल संधि के पूर्ण कार्यान्वयन की भी मांग की, जो दोनों देशों के बीच जल संसाधनों के बंटवारे की बात करती है।
ईरान के विदेश मंत्री ने रविवार को तालिबान के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव, ईरान में अफगान शरणार्थियों के साथ व्यवहार और पानी के अधिकारों पर चर्चा हुई। यह 2017 के बाद पहली बार था जब ईरान के विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल का दौरा किया।
विज्ञापन
'ईरान अफगान शरणार्थियों की वापसी के लिए प्रतिबद्ध'
ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची ने कहा कि उनका देश लगभग 35 लाख अफगान शरणार्थियों की वापसी के लिए प्रतिबद्ध है और वे अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। यह जानकारी अफगान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फित्रत के बयान से मिली।
अफगानिस्तान के कार्यवाहक पीएम का ईरान से अनुरोध
ईरानी विदेश मंत्री अरागची ने हेलमंद नदी जल संधि के पूर्ण कार्यान्वयन की भी मांग की, जो दोनों देशों के बीच जल संसाधनों के बंटवारे की बात करती है। वहीं अफगानिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री हसन अखुंद ने ईरान से अनुरोध किया कि वे अफगान शरणार्थियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर शरणार्थियों की वापसी को कम समय में संभालना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में अफगानों की फांसी जैसी घटनाएं जनता की भावनाओं को भड़काती हैं।
विज्ञापन
आर्थिक संबंध और रिश्तों में सुधार की उम्मीद
रविवार को इससे पहले ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने विदेश मंत्री अब्बास अरागची के हवाले से बताया कि वे अफगानिस्तान के साथ आर्थिक संबंध बढ़ाने और रिश्तों में सुधार की उम्मीद करते हैं, हालांकि इसमें 'उतार-चढ़ाव' रहे हैं।
तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देता है ईरान
ईरान तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देता, जिसने 2021 में अमेरिका और नाटो सेनाओं की वापसी के बाद सत्ता संभाली थी। लेकिन तेहरान ने काबुल के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए रखे हैं और तालिबान को ईरान की राजधानी में अफगानिस्तान का दूतावास संभालने की अनुमति दी है।