इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान पानी की बर्बादी के मामले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने सख्ती दिखाई है। मामला बंगलूरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम से जुड़ा है। एनजीटी ने जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड के चेयरमैन से रिपोर्ट मांगी है।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने बंगलूरू में पेयजल संकट के बीच आईपीएल मैचों के लिए मैदान तैयार करने में पीने के पानी का उपयोग करने पर नाराजगी जताई है। इस मामले में बंगलूरू जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड के चेयरमैन से रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है कि हर मैच में कितना पानी उपयोग किया जा रहा है और क्या इस पानी को भूगर्भ जल का दोहन कर निकाला जा रहा है?
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एनजीटी ने पानी की बर्बादी पर स्वत:संज्ञान लिया। एनजीटी के आदेश के अनुसार, उसके सामने यह तथ्य आया कि लोगों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है, जबकि जल बोर्ड ने बंगलूरू में लगातार तीन आईपीएल मैचों में लाखों लीटर शोधित पानी के उपयोग की कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन को इजाजत दे दी। मैच के लिए मैदान तैयार करने में करीब 75 हजार लीटर पानी की रोज जरूरत होती है।
मुंबई के मामले के साथ होगी सुनवाई
मुंबई में आईपीएल मैच में पानी की बर्बादी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्वत:संज्ञान के बाद एनजीटी ने जरूरी निर्देश दिए थे। इसका अनुपालन एनजीटी को सुनिश्चित कराना है। ऐसे में दो मई को इसकी सुनवाई होगी। बंगलूरू मामले की भी सुनवाई इसी के साथ ही होगी।
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कार धोने, बागवानी व निर्माण कार्यों में पेयजल के इस्तेमाल पर है रोक
बंगलूरू में करीब 14,000 बोरवेल में से 6,900 सूख चुके हैं। बंगलूरू जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड ने पीने के पानी का कार धोने, बागवानी और निर्माण कार्यों में उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। दूसरी तरफ मैच के लिए पेयजल और रसोई में उपयोग होने वाले शोधित पानी का उपयोग किया जा रहा है।
कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव को भी नोटिस
एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल ने बंगलूरू जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड को विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। इसमें स्टेडियम में पानी के उपयोग, इसके स्रोत की जानकारी देनी होगी। एनजीटी ने बोर्ड के चेयरमैन के अलावा कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, बंगलूरू के उपायुक्त व कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव को भी नोटिस जारी किया है।