देविंदर सिंह का नाम चर्चा में आया, तो केवल इस वजह से नहीं कि वह आतंकियों के खिलाफ चले ऑपरेशनों में आगे रहता था। बल्कि उसका नाम सभी जानते थे। इसका एक दूसरा कारण भी रहा। वह था पुलिस और जांच एजेंसियों के आला अफसरों के साथ उसकी जबरदस्त सेटिंग। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सैल और खुफिया एजेंसी में काम कर चुके दो पूर्व पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिस वक्त डीएसपी देविंदर सिंह और संसद पर हुए हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु के बीच संबंधों का पता चला, तो केंद्रीय एजेंसियों में हड़कंप मच गया था।
पूर्व अधिकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देविंदर सिंह और हिजबुल मुजाहिदीन के संबंधों को लेकर आईबी व जम्मू कश्मीर पुलिस को अहम जानकारी दी थी। उसमें बाकायदा कई ऐसे केसों का जिक्र किया गया, जिनमें देविंदर सिंह का सीधा हस्तक्षेप रहा। सेल ने अपने नेटवर्क के जरिए यह पता लगाया कि हिजबुल मुजाहिदीन के साथ संबंधों के अलावा अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में भी देविंदर का नाम है।
आरोप है कि देविंदर के दबाव के चलते ये सब जानकारी आगे नहीं बढ़ाई गई। कहा गया कि अभी तथ्य इतने ठोस नहीं है कि इनके बलबूते जांच शुरू हो सके। इसी तरह की स्थिति खुफिया एजेंसी की भी रही। विदेशी मामलों की खुफिया एजेंसी की बातें भी ज्यादा नहीं सुनी गई। जहां पर भी रिपोर्ट जाती, वहां से एक ही तरह का जवाब आता। मामला अभी कच्चा है, कुछ और साक्ष्य जुटाने होंगे।
एक एजेंसी ने इतना भी कहा कि संसद हमले में देविंदर सिंह की भूमिका को लेकर जांच हो सकती है। वजह, संसद हमले के मास्टर माइंड अफजल गुरू ने अपने पत्र में देविंदर का नाम प्रमुखता से लिया था। उन्होंने देविंदर को लेकर जो बातें बताई, उनका प्रारंभिक तौर पर पता लगाया गया, तो वे पूरी तरह खारिज नहीं हुई थी। खुफिया एजेंसी ने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की कार्रवाई में आरोपी अधिकारी की भूमिका का पता लगाया था। वहां से भी आरोपी के खिलाफ कई सबूत हाथ लगे थे।
1996 में देविंदर सिंह को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) में शामिल कर लिया गया। वहां पर उसने करीब 14 साल तक काम किया था। 2003 में उन्हें डीएसपी बनाया गया। खास बात है कि अफजल के पत्र के बाद केंद्रीय एजेंसियों ने अपने स्तर पर आरोपी डीएसपी के खिलाफ जो भी तथ्य जुटाए थे, उनकी जानकारी जम्मू कश्मीर पुलिस को दी गई थी। उस दौरान भी देविंदर का सिक्का खूब चल रहा था।
केंद्रीय एजेंसियों से पुख्ता जानकारी सामने आने के बाद भी आरोपी के खिलाफ जांच नहीं बैठाई गई। वह पहले की तरह अपनी खतरनाक राह पर चलता रहा। जो भी तथ्य मुहैया कराए गए, पुलिस ने उन्हें यह कह कर अस्वीकार कर दिया कि ये तो आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन की रणनीति का हिस्सा है। कई बार बड़े आतंकियों तक पहुंचने के लिए इस तरह के सीक्रेट मिशन अंजाम देने पड़ते हैं। अब उसी जम्मू कश्मीर पुलिस ने देविंदर सिंह को आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार कर लिया है।