सीबीआई ने एजेंसी के अंदर रिश्वतखोरी का कारोबार करने वाले अपने ही अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने सीबीआई के डीएसपी आरके ऋषि और इंस्पेक्टर कपिल धनखड़ को एक वकील के साथ गिरफ्तार किया है।
उन्होंने बताया कि आरोपी अधिकारियों ने 4,300 करोड़ रुपये के बैंक लोन की हेराफेरी में कंपनियों की मदद की। तीनों को सीबीआई कोर्ट में पेशी के बाद पांच दिन के सीबीआई रिमांड पर भेज दिया गया।
उधर, सीबीआई ने ऋषि के यूपी स्थित सहारनपुर और उनकी पत्नी के रुड़की स्थित घरों पर छापे मारे। सीबीआई ने ऋषि, धनखड़ और वकील मनोहर मलिक सहित डिप्टी एसपी आरके सांगवान और अन्य वकील अरविंद कुमार गुप्ता के खिलाफ जांच को प्रभावित करने का मामला दर्ज किया है।
एफआईआर में श्री श्याम पल्प एंड बोर्ड मिल्स के अतिरिक्त निदेशक मनदीप कौर ढिल्लो और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के निदेशकों सुजय देसाई और उदय देसाई के भी नाम हैं।
एफआईआर में कहा गया है कि स्टेट बैंक के प्रबंधक धनखड़ ने सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर इंस्पेक्टर के तौर पर शामिल होकर ऋषि और सांगवान के साथ मिलीभगत से काम किया।
गोपनीय सूचना लीक करने पर मिलते थे पैसे
एफआईआर के मुताबिक धनखड़, ऋषि और सांगवान को श्री श्याम पल्प के 700 करोड़ के ऋण घोटाले और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के 3,600 करोड़ के ऋण घोटाले में सूचना देने के बदले पैसे मिलते थे। धनखड़ को ऋषि और सांगवान से 10-10 लाख रुपये मिले। वहीं ऋषि को चंडीगढ़ स्थित कंपनी की मदद के बदले मलिक और गुप्ता के जरिये दो बार 15-15 लाख रुपये मिले।