अगर यही वजह थी, तो हर राजनीतिक दलों में ऐसे लोग हैं जो वकालत और राजनीति दोनों एक साथ कर रहे हैं। आप भी ऐसा कर सकते थे।
- मुझे लगता है कि दोनों भूमिकाओं में मैं एक साथ काम नहीं कर पाऊंगा। इसलिए मैंने खुद को अलग किया। बाकी कोई कौन क्या करता है, उस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
केजरीवाल के कई शीर्ष साथियों ने उनका साथ छोड़ दिया। ऐसी क्या वजह रही कि सबने एक-एक कर किनारा कर लिया?
- फिलहाल मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि सारे साथी साथ होते तो अच्छा होता। आज भी मैं चाहता हूं कि सभी पूर्व साथी एक साथ आकर जनता के लिए कुछ कर सकें तो बेहतर होगा। इसके लिए सबको बड़ा दिल दिखाना होगा। सबको एक साथ लाने के लिए मैं केजरीवाल से भी अपील कर रहा हूं, और दूर गए साथियों से भी।
केजरीवाल से अब आपके संबंध कैसे हैं?
- पार्टी में मुझे बहुत प्यार और इज्ज्त मिली। आज भी मेरे सबसे बेहतर संबंध हैं। एक दल के नेता और एक मुख्यमंत्री केजरीवाल से मेरा कोई संबंध नहीं है, लेकिन एक मित्र केजरीवाल से आज भी मेरे संबंध हैं और हमेशा रहेंगे। पहले के भी कई गए हुए साथियों से आज भी मेरे अच्छे संबंध हैं।
केजरीवाल सरकार के दिल्ली में कामकाज से संतुष्ट हैं?
- कई क्षेत्रों में सरकार ने अच्छा काम किया है। शिक्षा और स्वास्थ्य में बेहतर काम हुआ है। कई जगहों पर और बेहतर किया जा सकता है। अगर केंद्र का साथ मिलता तो और ज्यादा बेहतर काम हो सकता था।
राजनीति में वापसी करेंगे?
- तुरंत तो नहीं, लेकिन लंबे समय में मैं राजनीति में वापसी से इनकार नहीं करूंगा।
आप में आने का कोई अफसोस रहेगा?
- आप ज्वाइन करने का तो नहीं, लेकिन एक बात का मुझे हमेशा अफसोस रहेगा कि चाहे-अनचाहे योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का केजरीवाल के साथ हुए मतभेद के बीच में मेरा नाम आ गया। ऐसा न होता तो बेहतर होता।
पत्रकारिता से कोई एक स्वप्न लेकर आप राजनीति में आए थे। वह स्वप्न पूरा हो गया या टूट गया?
- शायद ये दोनों ही बातें मेरे साथ लागू नहीं होतीं, क्योंकि सपना तो है कि भारत के हर गरीब की थाली में दूध और रोटी हो, लेकिन इसे पूरा होना इतना आसान नहीं। टूटा इसलिए नहीं है क्योंकि कोशिशें हर तरफ से चल रही हैं। बेहतरी लगातार चालू है, एक दिन सभी सुखी होंगे, ये उम्मीद करता हूं।