केंद्रीय वित्त मंत्रालय का कहना है कि अब सरकार की पूरी कोशिश आयकर दाताओं की संख्या बढ़ाने की होगी। इस क्रम में ईमानदार करदाताओं को छेड़ा नहीं जाएगा और कर योग्य आमदनी होने के बावजूद आयकर का भुगतान नहीं करने वाले बेईमानों को छोड़ा भी नहीं जाएगा। आम बजट पेश होने के बाद अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने राजस्व सचिव हसमुख अढिया से विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के अंश:
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प्रश्न- बजट के जरिए आम जनता को क्या संदेश देने की कोशिश है?
उत्तर- बजट में सरकार की कोशिश रही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सहूलियत हो। इसमें जहां किसानों के हित में मजबूत कदम उठाए गए हैं वहीं अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें निम्न मध्य वर्ग के लोगों को आयकर में राहत देने की कोशिश है। साथ ही वैसे लोगों को आयकर के दायरे में लाने का प्रयास किया गया है जो कि कर योग्य आमदनी होने के बावजूद आयकर नहीं देते।
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भारत एक कल्याणकारी देश है
- फोटो : getty
प्रश्न- आप किस आधार पर कह रहे हैं कि आयकर नहीं देने वाले कर के दायरे में आ जाएंगे?
उत्तर- बजट बनाने से पहले हम लोग समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से मिलते हैं, उनसे फीडबैक लेते हैं। इसी क्रम में एक सुझाव आया कि आयकर के सबसे कम दर वाले स्लैब में यदि कर की दर कम रहती है तो ज्यादा लोग कर देने को प्रेरित होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने ढाई लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक के स्लैब में कर की दर में 50 फीसदी की कटौती कर दी है। हमने उनकी बातें सुनी हैं, अब हम उम्मीद करते हैं कि वे भी हमारी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।
प्रश्न- जो लोग ज्यादा आयकर देते हैं, वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें बेहतर सुविधा दे। उनके लिए सामाजिक सुरक्षा के अलग से इंतजाम हों। ऐसा हो सकता है?
उत्तर- भारत एक कल्याणकारी देश है। यहां सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं का लाभ देने के लिए यह नहीं देखा जाता है कि उसने कितना आयकर दिया है। हम तो सबसे ज्यादा खर्च उनके लिए करते हैं, जिनके पास आमदनी का कोई नियमित जरिया भी नहीं है।
जहां तक ज्यादा आयकर देने वालों के लिए विशेष इंतजाम की बात है, तो इससे मैं इत्तफाक नहीं रखता। किसी व्यक्ति से ज्यादा आयकर इसलिए वसूला जाता है क्योंकि वे ज्यादा कमाते हैं। वे ज्यादा इसलिए कमा पा रहे हैं, क्योंकि सरकार ने उनके लिए ढांचागत सुविधाएं विकसित की हैं, उनकी सुरक्षा का इंतजाम किया है। उनके लिए वैसा माहौल तैयार किया है, जिनमें वे बेहतर तरीके से फल-फूल सकें।
प्रश्न- नोटबंदी के दौरान जिन्होंने तकलीफ झेली है, उन्होंने बजट में कुछ ज्यादा राहत की उम्मीद की थी। उनकी उम्मीद पूरी क्यों नहीं हुई?
उत्तर- हमने आयकर के निचले स्लैब में 50 फीसदी की कटौती की है। इससे न सिर्फ निम्न मध्य वर्ग के लोगों को लाभ होगा बल्कि 20 फीसदी और 30 फीसदी के टैक्स स्लैब में आने वालों को भी लाभ हुआ है। हमारे इस फैसले से हर व्यक्ति को 12,500 रुपये तक का लाभ हुआ है। आयकर में इतनी कमी तो पहले चरण में हुई है। आगे हम अपनी स्थिति देखेंगे कि राजस्व वसूली में कितनी बढ़ोतरी हुई है। फिर दूसरे चरण में और राहत देंगे।
प्रश्न- तो क्या वित्त वर्ष के बीच में दरें बदलेंगी?
उत्तर- नहीं-नहीं। अब तो जो होगा अगले बजट में ही होगा।
प्रश्न- चालू वित्त वर्ष के दौरान आपने कर वसूली में बढ़ोतरी का लक्ष्य 17 फीसदी रखा है, जबकि अगले वर्ष के लिए इस लक्ष्य को घटा कर 12.2 फीसदी कर दिया है। ऐसा क्यों?
उत्तर- ऐसा अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में तब्दीली की वजह से हुआ है। अगले वित्त वर्ष के दौरान वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली (जीएसटी) लागू हो रही है। उसमें सीमा शुल्क को छोड़ कर शेष केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर जीएसटी में समाहित हो जाएंगे। वैसी स्थिति में कर वसूली क्या रहती है, इसे देखना होगा।
यही वजह है कि हमने इस मामले में सुरक्षित तरीके से लक्ष्य तय किया है। यदि ज्यादा वसूली हो गई तो कोई बात नहीं, लेकिन यदि कम वसूली होती है तो दिक्कत होगी। क्योंकि कर वसूली के हिसाब से खर्च का तो हिसाब पहले से ही तय हो जाता है।
प्रश्न- आपके इतना करने पर भी बेईमान लोग आयकर नहीं चुकायेंगे, तब क्या करेंगे?
उत्तर- वह तो हमारे ऊपर छोड़ दीजिए। हमारे पास सूचनाएं हैं कि किसके बैंक खाते में कितने का ट्रांजेक्शन हुआ है, किसने कितने की खरीदारी की है। किसने कार खरीदी, किसने सोने का हार, सब की जानकारी हमारे पास है। हमारे पास तो यह भी जानकारी है कि किसने विदेश में छुट्टी मनाई है और किसने एक सप्ताह तक केरल में छुट्टी काटी है। इसलिए लोग मुगालते में नहीं रहें। हम ईमानदार करदाताओं को छेड़ेंगे नहीं, लेकिन बेईमानों को छोड़ेंगे भी नहीं।