अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सात मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों और शरणार्थियों पर देश में प्रवेश करने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में अमेरिका और यूरोप के कई शहरों में कई हजार लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। यह संघीय अदालत के जजों द्वारा यात्रा प्रतिबंध को निलंबित किए जाने के बावजूद इसके विरोध में लंदन और पेरिस से न्यूयॉर्क और वाशिंगटन तक हजारों लोग सड़कों पर उतरे और नारेबाजी की।
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में अब तक यह सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है, जिसमें 10000 लोगों ने काले बैनर के साथ प्रदर्शन किया और ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरेसा मे के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के बैनर पर लिखा था, ‘टेरेसा मे : तुम्हें शर्म आनी चाहिए।’ प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हम नए अमेरिकी नेता का ब्रिटिश प्रधानमंत्री के समर्थन की निंदा करते हैं। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राजदूत से मे के डाउनिंग स्ट्रीट कार्यालय तक प्रदर्शन किया।
उन्होंने अपने नारेबाजी में कहा कि मुस्लिमों को बली का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए और समाजवाद कोई ट्रंपवाद नहीं है। प्रदर्शनकारियों के काले बैनर में यह भी लिखा था, ‘नो टू ट्रंप और नो टू वार’। उल्लेखनीय है कि 27 जनवरी को अपने कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने ईरान, इराक, लिबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन समेत सात मुस्लिम देशों के नागरिकों और शरणार्थियों पर अमेरिका में प्रवेश से प्रतिबंध लगा दिया था।
हालांकि अमेरिकी संघीय जज ने ट्रंप के प्रतिबंध पर अस्थायी रोक लगा दी है। दूसरी ओर अटलांटा में 3000 लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। यूरोप में पेरिस और बर्लिन के शहरों पर हजारों लोग विरोध में सड़कों पर उतरे। वहीं ब्रिटेन ने ट्रंप के फैसले के विरोध में ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान में 1.8 मिलियन से ज्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया।