दुनिया में नए तौर तरीकों की मदद से हो रहे अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए 194 देशों की पुलिस को ‘गहरी पहुंच’ वाला एक सिस्टम मुहैया कराया जाएगा। इस सिस्टम के जरिए पुलिस संगठनों को जो प्लेटफार्म मिलेगा, उसकी मदद से जांच की प्रक्रिया बहुत सरल और त्वरित हो सकेगी। पुलिस को अपराध की सही तस्वीर मिलेगी, जिससे घटना का सूक्ष्म विश्लेषण संभव हो सकेगा।
इनसाइट टूल एंड टेक्निकल सिस्टम कई चरणों में पूरा होगा। हालांकि इसके पहले चरण पर कार्य शुरू कर दिया गया है। जुलाई 2021 तक इसका सामान्य प्लेटफार्म तैयार होगा और 2025 में यह सिस्टम अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करना शुरू कर देगा। इस सिस्टम की अवधारणा ‘राइट डाटा इन राइट हैंड’ पर निर्धारित की गई है।
इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, अनेक अपराध ऐसे होते हैं, जिन्हें समय रहते रोका जा सकता है। इनमें मुख्य तौर से संगठनात्मक क्राइम और साइबर अपराध शामिल हैं। ऐसे अपराधों की प्लानिंग बहुत पहले से की जाती है। इंटरपोल ने गत वर्ष एक सितंबर से लेकर 30 नवंबर तक 35 देशों में संगठनात्मक अपराध, जो टेली कम्युनिकेशन और सोशल इंजीनियरिंग के प्लेटफार्म पर अंजाम दिए जाते थे, उन्हें लेकर पर्पल नोटिस जारी किया गया था। इस पर सभी सदस्य देशों ने काम किया।
करीब 10380 जगहों पर छापेमारी की गई। फ्रॉडस्टर और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों को अंजाम देने वाले 21549 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इन देशों में 310 बैंक खाते सील कर 150 मिलियन डॉलर (11 अरब रुपये) की राशि जब्त की गई।
इनसाइट सिस्टम के जरिए क्राइम डाटा को तेजी के साथ विभिन्न देशों की पुलिस तक पहुंचाया जाएगा। चूंकि यह एक संयुक्त प्लेटफार्म होगा, इसलिए अपराधिक डाटा एकत्रित करना आसान होगा। उस डाटा की स्टोर प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद उस जानकारी का विश्लेषण और व्याख्या पर काम होगा।
विभिन्न स्रोत के माध्यम से उस जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। स्टेट ऑफ आर्ट फ्रेमवर्क के साथ मॉर्डन टेक्नोलाजी विकसित होगी। इसमें विभिन्न देशों के पुलिस संगठनों में रणनीतिक निर्णय लेने वाले अधिकारी शामिल रहेंगे। वे तय करेंगे कि भविष्य के लिए विश्लेषणात्क प्लेटफार्म की दिशा क्या रहे। हालांकि अपराध की सूचना समय पर सभी देशों को मिल जाए, यह सबसे पहला काम होगा।
इस योजना कई चरण होंगे। अगले साल के मध्य तक इनसाइट का सामान्य प्लेटफार्म तैयार हो जाएगा। अपराधियों का नेटवर्क, उसे काउंटर करने की रणनीतिक रचना और ज्योग्राफ़िक विश्लेषण, ये सब पहले चरण का हिस्सा रहेंगे। दूसरा चरण जो कि 2023 तक शुरू हो पाएगा, उसमें इंटेलिजेंस सूचनाएं शेयर करने को लेकर काम किया जाएगा। सदस्य देशों को किसी मामले की जांच में गहराई से विश्लेषण करने का मौका मिलेगा। उन्हें अतिरिक्त स्रोत डाटा मुहैया कराया जाएगा। डैश बोर्डिंग, वेब कॉलिंग, आर्टिफ़िशिंयल इंटेलिजेंस, करेक्टर रिकग्निशन और पायलट एक्सेस की सुविधा दूसरे चरण में शुरु होगी।
तीसरे चरण में यह सिस्टम पूरी तरह से चालू हो जाएगा। इंटरनल और एक्सटर्नल डाटा का आदान प्रदान होगा। खास बात यह रहेगी कि सदस्य राष्ट्रों के साथ जो सूचना या डाटा शेयर होगा, वह एडवांस टेक्नीकल सिस्टम पर आधारित होगा। इस डाटा को दोनों तरह के स्रोतों से मेल कर परखा जाएगा। इसमें विजुअल, ऑडियो, फेशियल बायोडाटा मैचिंग और आउटपुट विश्लेषण भी रहेगा। इन सबके जरिए सदस्य देशों को अपराध की रोकथाम और जांच कार्य में सर्वोत्तम मदद मिल सकेगी। अपराध की थ्योरी, क्रॉस बॉर्डर गतिविधि, डिजिटल एवं फिजिकल क्राइम के बारे में ज्यादा बेहतर तरीके से आगाह करना संभव हो सकेगा।