सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आतंकवाद के खात्मे के लिए इसे प्रश्रय देने वाले देशों से निपटने की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए आतंकवाद का सहारा लेने का आरोप लगाया।
सेना प्रमुख ने कहा- हालांकि यह सच्चाई है कि
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई आतंकवाद पीड़ित देशों को ही लड़नी होगी, मगर यह भी सच है कि जब तक दुनिया इसके खिलाफ एकजुट लड़ाई नहीं लड़ती तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
रायसीना डायलॉग में सेना प्रमुख ने आतंकियों के वित्त पोषण, उनके हाथों में रासायनिक और परमाणु हथियार आ जाने की संभावना पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि विश्व शांति के लिए सबसे बड़े खतरे आतंकवाद से निपटने के लिए इंटरनेट को भी नियंत्रित करने की जरूरत है।
सेना प्रमुख ने कहा कि आतंकवाद को युद्ध के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह मानवता के प्रति सबसे बड़ा अपराध है। इसलिए अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए आतंकवाद को प्रश्रय देने वाले देशों से भी निपटने की जरूरत है।
जनरल रावत ने कहा कि आतंकी संगठनों के पास अथाह धन है। यह धन कहां से आता है? कौन कौन देश आतंक को प्रश्रय दे रहे हैं? धन के स्रोत पर रोक लगाना और ऐसे देशों से निपटना वक्त की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद पीड़ित अपने देश को इससे लड़ने के लिए अन्य देशों के सहयोग और समर्थन की जरूरत पड़ेगी, मगर यह भी सच है कि इसके खिलाफ लड़ाई हमें खुद ही लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि जो देश विभिन्न तरीकों से आतंकवाद की मदद करते हैं उन्हें अतीत नहीं भूलना चाहिए। ऐसे देशों के लिए ही आतंकवाद आगे चलकर बड़ी समस्या बन गई है।