आर्थिक संकटों से घिरे आईआईटी कानपुर ने अंडर ग्रेजुएट (यूजी) और पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) स्टूडेंटों का इंटरनेशनल टूर बंद कर दिया है। अब आईआईटी के खर्च पर स्टूडेंट विदेश जाकर पढ़ाई या फिर रिसर्च नहीं कर सकेंगे। सबको अपने खर्च पर जाना-रहना-खाना होगा। अभी तक स्टूडेंटों को आईआईटी कानपुर आर्थिक सहायता मुहैया कराता था।
केंद्रीय वित्त और मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आईआईटी कानपुर के सालाना बजट में करीब 70 करोड़ रुपये की कटौती कर दी है। इससे आर्थिक संकट गहरा गया है। इंटरनेशनल हॉस्टल सहित तमाम भवनों का निर्माण कार्य ठप हो गया है।
पठन-पाठन और रिसर्च का काम भी प्रभावित है। आईआईटी प्रशासन ने स्टूडेंट, शिक्षक और कर्मचारियों के खर्चों में भी कटौती की है। सबसे पहले स्टूडेंटों का इंटरनेशनल टूर रोका गया है। इसके तहत बीटेक (चार साल के दौरान) करने वाले हर स्टूडेंट को 50 हजार रुपये दिए जाते थे लेकिन मार्च 2016 से यह धनराशि देने का सिलसिला बंद कर दिया गया।
यही नहीं शिक्षक और कर्मचारियों को भी झटका लगा है। इन सबको बच्चे की पढ़ाई के लिए सालाना 15 हजार रुपये मिलते थे। पहले चरण में 40 वरिष्ठ शिक्षकों के बच्चों की पढ़ाई के बिल रोके जाने की सूचना है। आईआईटी प्रशासन का कहना है कि इस मद में सालाना एक करोड़ रुपये का खर्च किया जाता है।
''खर्च में कटौती की कवायद चल रही है। इसके दायरे में स्टूडेंट, शिक्षक और कर्मचारी आएंगे''। - प्रो. एके चतुर्वेदी, डिप्टी डायरेक्टर आईआईटी कानपुर