देश में कोरोना की दूसरी लहर फरवरी के मध्य में शुरू हुई लेकिन अप्रैल आने तक इसने तबाही मचा दी है। हर जगह ऑक्सीजन को लेकर त्राहिमाम की स्थिति रही लेकिन ओडिशा एक ऐसा राज्य उभरकर सामने आया, जिसने ऑक्सीजन से त्रस्त राज्यों को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की।
ओडिशा सरकार की तैयारियों की सराहना की
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लांसेट ने भी कोरोना के प्रति ओ़डिशा सरकार की तैयारी और अलग-अलग राज्यों के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन और उनकी आपूर्ति करने की सराहना भी की। आठ मई को लांसेट में छपे उसके संपादकीय शीर्षक 'भारत की कोविड-19 इमरजेंसी' में लिखा गया कि कोरोना की दूसरी लहर में ओडिशा ने बेहतरीन काम किया है और इतनी ऑक्सीजन का उत्पादन किया कि समय से दूसरे राज्यों को जरूरत पड़ने पर भेजा।
केरल सरकार का भी किया जिक्र
इसके अलावा लांसेट के लेख में केरल राज्य की भी तारीफ हुई लेकिन इसी के साथ कई अहम मुद्दों को भी उठाया गया, जिस पर केंद्र को चर्चा करनी चाहिए थी। लेख में लिखा गया कि भारत में दूसरी लहर के दौरान ओडिशा और केरल ने पहले से ही तैयारी करके रखी और यही वजह रही कि समय आने पर इन दोनों राज्यों ने दूसरे राज्यों को ऑक्सीजन की सप्लाई की।
11 राज्यों को 473 ऑक्सीजन टैंकर भिजवाए
बता दें कि पिछले 17 दिनों में ओडिशा सरकार ने ऑक्सीजन की कमी से परेशान 11 राज्यों को 473 ऑक्सीजन टैंकर भेजे, जिसमें 8689.6 मीट्रिक टन ऑक्सीजन थी। ओडिशा की ओर से महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्रप्रदेश समेत दूसरे राज्यों को ऑक्सीजन की सप्लाई हुई।
जिस दौरान राज्यों में ऑक्सीजन की मारामारी थी, उस समय ओडिशा सरकार ने उद्योगों को दी जाने वाली ऑक्सीजन पर रोक लगा दी थी। वहीं अधिकारियों को रियल टाइम डाटा एकत्र करने के निर्देश दे दिए गए थे। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की तीन स्तरीय निगरानी की गई। मैन्यूफैक्चरिंग-फिलिंग स्टेशन-अस्पताल की तर्ज पर ये काम हुआ।
केंद्र सरकार की लगाई फटकार
ओडिशा और केरल राज्य की तारीफ के अलावा लांसेट ने केंद्र सरकार की योजनाओं पर भी आपत्ति जताई। लांसेट के लेख में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा गया कि सुपर स्प्रेडर कार्यक्रमों के खिलाफ चेतावनी जारी करने की बजाय केंद्र सरकार धार्मिक त्योहारों को करने की अनुमति दी। लोगों की भीड़ जुटाकर चुनावी रैलियां की गईं।