प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का उद्घाटन किया है। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और इससे जुड़े तमाम लोग मौजूद रहे। 30 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में 100 से ज्यादा देशों के 1,500 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता गठबंधन के 130 साल के इतिहास में पहली बार भारत में वैश्विक सहकारिता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर पीएम मोदी ने सहकारी आंदोलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया।
इस कार्यक्रम में भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे के और फिजी के उप प्रधानमंत्री मनोआ कामिकामिका भी मौजूद रहे। सहकारी आंदोलन के विकास के लिए मंत्रालय की ओर से तीन साल में की गई 54 पहलों को लेकर भी इस आयोजन में विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि दुनिया भारत में सहकारिता के बढ़ते कदमों से परिचित हो सके।
'भारत में हम सहकारी आंदोलन को नया आयाम दे रहे हैं'
वहीं इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, आज जब मैं आप सभी का स्वागत कर रहा हूं, तो मैं यह अकेले नहीं कर रहा हूं, मैं यह नहीं कर सकता। मैं आप सभी का किसानों, मछुआरों, स्वयं सहायता समूहों की 10 करोड़ महिलाओं, 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं की ओर से स्वागत करता हूं।
भारत के लिए सहकारिता संस्कृति का आधार- पीएम
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'यह कॉन्फ्रेंस पहली बार भारत में आयोजित की जा रही है। भारत में हम सहकारी आंदोलन को नया आयाम दे रहे हैं। यह कॉन्फ्रेंस भारत की भविष्य की सहकारी यात्रा के लिए आवश्यक जानकारी देगी। भारत के अनुभव वैश्विक सहकारी आंदोलन को 21वीं सदी के नए उपकरण और भावना प्रदान करेंगे... दुनिया के लिए सहकारिता एक मॉडल है, भारत के लिए यह संस्कृति का आधार है, एक जीवनशैली है।
आईसीए ग्लोबल कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस 2024 में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, स्वतंत्रता क्रांति से जन्मा अमूल आज का शीर्ष वैश्विक खाद्य ब्रांड है। भारत में, सहकारी समितियों ने यात्रा की है विचार से आंदोलन, क्रांति और फिर सशक्तिकरण तक।
वहीं इस पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'मैं 2025 को संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाने के लिए धन्यवाद देता हूं। तीन साल पहले प्रधानमंत्री ने सहकारिता मंत्रालय खोलने का फैसला लिया था।