अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतें तीन माह के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आया। ओपेक और उसके सहयोगी देशों की ओर से तेल उत्पादन में कटौती किए जाने से भविष्य में इसकी कीमतें और बढ़ने की आशंका है।
निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक और सहयोगी रूस ने अपने उत्पादन में बड़ी कटौती शुरू कर दी है। इसके असर से ब्रेंट क्रूड के दाम शुक्रवार को इस साल के उच्च स्तर 65.10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। इसमें महज एक सप्ताह के भीतर ही 1 फीसदी का उछाल आया है।
सऊदी-रूस की बड़ी कटौती
ओपेक के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता देश सऊदी अरब ने मार्च तक अपने उत्पादन में 5 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती का एलान किया है। उसने अपने सबसे बड़े ऑफशोर तेल क्षेत्र को भी आंशिक तौर पर बंद कर दिया है, जिसकी उत्पादन क्षमता 10 लाख बैरल प्रतिदिन की है। इसी तरह, रूस ने भी अपने उत्पादन में बड़ी कटौती की तैयारी कर ली है। उसका 31 दिसंबर, 2018 को कुल उत्पादन 1.15 करोड़ बैरल प्रतिदिन था, जो 31 जनवरी, 2019 को घटकर 1.13 करोड़ बैरल प्रतिदिन हो गया। रूस का लक्ष्य 1.11 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन का है।
और बड़ी कटौती की आशंका
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच का कहना है कि सऊदी, कुवैत, यूएई, वेनेजुएला, ईरान में तेल उत्पादन प्रभावित होने से इस साल ब्रेंट क्रूड के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेंगे। साथ ही 2019 की चौथी तिमाही में ओपेक की ओर से तेल आपूर्ति में कुल कटौती 25 लाख बैरल प्रतिदिन तक हो सकती है। हालांकि, अमेरिका अपने उत्पादन को मौजूदा 1.19 करोड़ बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 1.30 करोड़ बीपीडी कर सकता है, जिससे कीमतों को सहारा मिलेगा।
पेट्रोल-डीजल में आया उछाल
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से घरेलू बाजार में लगातार दूसरे दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आया। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल 7 पैसे महंगा होकर 70.46 रुपये प्रति लीटर रहा जबकि डीजल 6 पैसे महंगा होकर 65.73 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। पिछले दो दिनों में पेट्रोल 13 पैसे महंगा हुआ है जो क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से आने वाले दिनों में और ज्यादा महंगा हो सकता है।