सीबीआई में अधिकारियों के बीच अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और उनके मातहत काम करने एजेंसी के दूसरे नंबर के अधिकारी विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच जारी लड़ाई शुक्रवार को तब सार्वजनिक हो गई, जब वर्मा ने उनके बारे में दिए गए अस्थाना के बयानों को 'दुर्भावानापूर्ण' और 'छिछोरा' बताया। बता दें कि सीबीआई करीब आधा दर्जन मामलों में अस्थाना की भूमिका की जांच कर रही है।
सीबीआई प्रवक्ता ने अस्थाना पर अधिकारियों को धमकाने का आरोप लगाया। आलोक वर्मा का कहना है कि अस्थाना खुद के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे सीबीआई के अधिकारियों को धमका रहे हैं। सीबीआई प्रवक्ता ने अस्थाना के उस आरोप को नकार दिया है जिसमें कहा गया है कि आलोक वर्मा ने अहम मामलों की जांच रोकने के आदेश दिए थे। इनमें आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़ा मामला भी शामिल है जिसमें लालू प्रसाद यावद और उनका परिवार आरोपी है।
अस्थाना ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को पत्र लिखकर ये आरोप लगाए थे।
सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई निदेशक की छवि खराब करने के लिए बिना तथ्यों की पुष्टि किए सार्वजनिक रूप से बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं और एजेंसी के अधिकारियों को डराया जा रहा है।'
यह घटना सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच जारी लड़ाई को नए मोड़ पर ले आई है जो बहुत पहले से जारी है। बता दें कि आलोक वर्मा ने भ्रष्टाचारा का आरोप लगाते हुए अस्थाना के विशेष निदेशक के रूप में पदोन्नति का विरोध किया था। सीवीसी ने हालांकि अस्थाना को क्लीन चिट दे दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी पदोन्नति के फैसले पर मुहर लगा दी थी।
हालांकि इसके बाद भी दोनों के बीच जारी तनाव कम नहीं हुआ। वर्मा ने सीबीआई प्रमुख की अनुपस्थिति में विशेष निदेशक को एजेंसी के कार्यकारी प्रमुख के तौर पर मान्य करने के सीवीसी के फैसले पर आपत्ति जताई थी। लेकिन शुक्रवार को सार्वजनिक बयानबाजी और सीवीसी को की गई अस्थाना की शिकायत, पहली बार देखने को मिला जिससे एजेंसी के दिग्गज और सरकार भी सकते में आ गई।
सरकार के एक वरिष्ठ व्यक्ति ने कहा, "ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि सप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एजेंसी की स्वायत्ता की सीमा तय कर दी गई है।"