सियासत और विरासत के रंग गुजरात के जामनगर में आज भी साथ-साथ देखने को मिलते हैं। इन्हीं दोनों के बीच तालमेल बनाते हुए जामनगर के लोग इस बार भी चुनावी एजेंडे को देख रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी मिसाल है यहां का ऐतिहासिक रणमाल लेक, जिसे परंपरागत रूप से लखोटा तालाब के नाम से जाना जाता है।
बरसों तक चली सियासत
इस विशाल लेक के सौंदर्यीकरण को लेकर यहां बरसों तक सियासत चली। शहर के लोगों के लिए ये एक ऐसी शानदार और सुकून देने वाली जगह है, जहां घंटों बिताना और जामनगर के इतिहास को जानने समझने के साथ सबसे ज्यादा प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों को देखना एक शानदार अनुभव जैसा है।
जाम शासकों ने लखोटा तालाब के बीचोबीच एक शानदार महल बनवाया था, जहां तक पहुंचने का एक लंबा रास्ता है। अब यह एक संग्रहालय है और तकरीबन एक दशक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे खूबसूरत बनाने का ऐलान किया था।
कांग्रेस और भाजपा की सियासी जंग के बीच ये प्रोजेक्ट फंसा रहा, लेकिन ढाई साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने जामनगर के विकास के लिए जो 112 करोड़ रुपए मंजूर किए उसमें 8 करोड़ इस लेक के विकास के लिए थे।
अब ये लेक यहां के लोगों के लिए बेहतरीन पर्यटन स्थल है। जामनगर नगरपालिका पर कांग्रेस का कब्जा रहा है और इस शानदार झील के विकास का श्रेय लेने में कांग्रेस और भाजपा में होड़ लगी है। पटेलों के दबदबे वाले इस इलाके में आनंदीबेन पटेल के काम को पाटीदारों को लुभाने वाला कदम भी माना गया लेकिन अब न तो आनंदीबेन हैं और न पाटीदार भाजपा के साथ नजर आ रहे हैं।
राहुल ने की थी शुरुआत
सौराष्ट्र के पेरिस कहे जाने वाले जामनगर से ही राहुल गांधी ने भी अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की और यहीं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी खानदान पर हमले तेज़ किए। कांग्रेस इस बात को मुद्दा बना रही है कि जामनगर के व्यापारियों को नजरअंदाज किया गया, अपने बेदी बंदरगाह की जगह कांधला पोर्ट को विकसित किया गया, शिक्षा का व्यापारीकरण और निजीकरण कर दिया गया, अस्पतालों की हालत खराब हो गई और भाजपा ने जामनगर के विरासत को बचाने की जगह चंद उद्योगपतियों के हितों के लिए काम किया।
वहीं भाजपा अपने 22 साल के विकास की कहानी कहकर जामनगर की तस्वीर बदलने का दावा कर रही है। वह इस बात से खुश है कि जामनगर की 5 सीटों में से पिछली बार जो 2 कांग्रेसी विधायक चुने गए थे, वो भी अब भाजपा के साथ हैं जबकि कांग्रेस का दावा है कि जामनगर की विरासत को बचाते हुए विकास की नई इबारत वही लिख सकती है। जाहिर है इस बार के दिलचस्प चुनावी जंग का साक्षी बनने जा रहा है यहां का लखोटा तालाब।
जामनगर देश का इकलौता ऐसा इलाका है जहां सेना के तीनों अंगों (जल, थल और वायु) के बेस स्टेशन हैं, दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है, औद्योगिक आवाजाही के लिए बेदी बंदरगाह है, क्रिकेट की एक शानदार विरासत है। यहां के जाम शासकों दिलीपसिंह जी और रणजीतसिंह जी के नाम पर खेले जाने वाले क्रिकेट के दो अहम टूर्नामेंट हैं- दिलीप ट्रॉफी और रणजी ट्रॉफी और जहां से सलीम दुर्रानी, विनोद मांकड, करसन घावरी से लेकर अजय जडेजा और रवींद्र जडेजा जैसे शानदार क्रिकेटरों ने देश का नाम रोशन किया है।
किसी ज़माने का नवानगर जबसे जामनगर बना और जडेजा शासकों ने यहां की तस्वीर बदली तभी से सौराष्ट्र का ये अहम शहर गुजरात ही नहीं देश के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों में शामिल हो गया।