वित्तमंत्री ने कहा कि आरबीआई को दरें बढ़ानी ही थीं, लेकिन मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की दो बैठकों के बीच इसे बढ़ाना हैरान करने वाला था। अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया में भी ऐसे कदम उठाए गए, यह बताता है कि वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक सामंजस्य से काम कर रहे हैं। कोविड से बिगड़े हालात से उबरना सभी देशों के लिए चिंता का समान विषय रहा है।
आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में अचानक वृद्धि करने से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को भी हैरानी हुई। उन्हाेंने शनिवार को कार्यक्रम में कहा कि इस वृद्धि की अपेक्षा पहले से थीं लेकिन जिस समय इसे किया गया, वह हैरान करने वाला है। हालांकि उन्हाेंने आश्वस्त किया बढ़ी दरों का असर सरकार के बुनियादी ढांचे में प्रस्तावित निवेश पर नहीं होगा।
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वित्तमंत्री ने कहा, आरबीआई को दरें बढ़ानी ही थीं, लेकिन मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की दो बैठकों के बीच इसे बढ़ाना हैरान करने वाला था। अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया में भी ऐसे कदम उठाए गए, यह बताता है कि वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक सामंजस्य से काम कर रहे हैं। कोविड से बिगड़े हालात से उबरना सभी देशों के लिए चिंता का समान विषय रहा है।
तेल खरीद : रूस पर प्रतिबंधों से इंडियन बास्केट पर दबाव बढ़ेगा
वित्तमंत्री ने कहा, यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच अमेरिका द्वारा रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने से कई देश अब तेल खरीद के लिए भारत के दशकों पुराने पारंपरिक स्रोतों की ओर मुड़ रहे हैं, जिनमें अरब देश प्रमुख हैं। हमारी 80-85 प्रतिशत खरीद अरब देशों से होती है। इससे तेल खरीद की इंडियन बास्केट पर दबाव बढ़ेगा। अब हमें भी वैकल्पिक स्रोतों की ओर देखना होगा।
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जहां सस्ता मिलेगा, हम वहां से खरीदेंगे
वित्तमंत्री ने साफ किया, ‘भारत को जहां से सस्ता तेल मिलेगा, वहां से खरीद होगी। यह हमारा अधिकार है। हमारे लिए जो अच्छा होगा, हम करेंगे। हमें सस्ता तेल कहीं मिल रहा है, तो हम क्यों न खरीदें?’