भारतीय वायुसेना ने मंगलवार तड़के पाकिस्तान स्थित आतंकी कैंपों पर असैन्य कार्रवाई की थी। सूत्रों का कहना है कि बालाकोट के प्रशिक्षण केंद्र में आतंकी एक मस्जिद का इस्तेमाल अपनी सुरक्षा के कवर के तौर पर कर रहे थे। यह शिविर 6 एकड़ में फैला हुआ है जिसमें 5-6 इमारते हैं और यहां 600 से ज्यादा लोगों के रहने की क्षमता है।
अधिकारियों का कहना है कि खुफिया रिपोर्ट के अनुसार कैंप का इस्तेमाल युवाओं को बरगलाने के लिए होता था। उन्हें आईसी 814 विमान अपहरण और 2002 गोधरा कांड की प्रोपागैंडा वाली वीडियो दिखाई जाती थी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद आतंकियों को मुख्य रूप से चार मार्गों के जरिए जम्मू-कश्मीर भेजा जाता था। यह सभी रास्ते कुपवाड़ा तक जाते थे।
एक अधिकारी ने कहा कि इन आतंकियों की पहचान बालाकोट-केल-दुधनियाल, केल-कैंथावली, केल-लोलाब जिला और केल-केचामा क्रालपोरा के तौर पर की जाती थी। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार इस कैंप का इस्तेमाल आतंकियों को विभिन्न तरह के कोर्स कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। जैसे कि तीन महीने का एडवांस कॉम्बैट कोर्स जिसे कि दौरा-ए-खास कहा जाता है। उन्नत सशस्त्र प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को दौम-एल-राद कहा जाता है और एक रिफ्रेशर ट्रेनिंग कार्यक्रम भी चलता था।
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, 'वहां मौजूद आतंकियों को एके 47, मशीन गन, एलएमजी, रॉकेट लांचर, अंजर बैरल ग्रेनेड जैसे हथियारों चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता था। हथियारों के बुनियादी प्रशिक्षण के अलावा उन्हें जंगल में रहने, एम्बुश (घात लगाना) और जीपीएस और नक्शा पढ़ने के जरिए संचार करने का भी प्रशिक्षण दिया जाता था।' अधिकारियों का कहना है कि जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना से पहले इन कैंपों का इस्तेमाल हिज्बुल मुजाहिद्दीन किया करता था।
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार कैंपों में मौजूद आतंकियों के दिन की शुरुआत सुबह 3 बजे कुरान पढ़ने और फिर व्यायाम से होती थी। इसके बाद उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण और छद्मावरण से छिपने का सबक, घात लगाने और छिपना सिखाया जाता था। माना जा रहा है कि इस कैंप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आतंकियों की संख्या 300-400 के बीच थी।