जांच एजेंसियो और कानून पर अमल करवाने वाली संस्थाओं का कहना है कि वाट्सऐप और फेसबुक आतंकी गतिविधियों की जांच में उनकी सहायता नहीं कर रही हैं। शुक्रवार को हुई इस बैठक में जांच एजेंसियों ने बताया कि कैसे उन्हें इन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म से सहयोग नहीं मिल रहा है।
सूत्रों ने बताया कि सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेश और केंद्रीय पुलिस संगठनों की जांच एजेंसियों ने आतंकवाद निरोधी रणनीति पर विचार विमर्श किया गया। सालाना राष्ट्रीय
सुरक्षा एजेंसियों की बैठक होती है जिसमें नई-नई रणनीति बनाई जाती हैं।
इस साल इंटेलिजेंस ब्यूरो के मुख्यालय में बैठक का आयोजन किया गया था। किसी भी विशेष टेरर मॉड्यूल पर विशेष ध्यान देने के बजाय पूरी चर्चा जांच, उसे खत्म करने की कार्यप्रणाली पर ही रही। बातचीत के दौरान आतंक से लड़ने की रणनीति तैयार करने, सफलतापूर्वक जांच करने और आंतकी मामलों की पैरवी करने जैसे मामलों को लेकर चर्चा हुई।
सभी ने इस बात को माना कि विदेशी मैसेजिंग सर्विस जैसे कि
वाट्सऐप और फेसबुक से अमूमन यह अनुरोध किया जाता है कि वह संदिग्ध आतंकियों द्वारा अपने सर्वर पर हुई बातचीत को पढ़ने वाले फॉर्मेट में जाच एजेंसियों को मुहैया करवाएं मगर वह ऐसा नहीं करते हैं।
कॉन्फ्रेंस में एक अधिकारी ने कहा कि इसकी वजह से कई बार जांच में देरी होने के साथ ही जांच अंजाम तक नहीं पहुंच पाती हैं। कॉन्फ्रेंस में लेफ्ट विंग उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को लेकर एक कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें पैनल डिस्कशन हुआ। जहां यह बात सामने आई कि एलडब्ल्यूई में पहले से कमी आई। वहीं पैनल अधिकारियों ने माना कि जब तक माओवादियों को को घुटनों पर नहीं लाया जाता तब तक सभी को पूरी तरह से अलर्ट रहना होगा।