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दावे में देरी होने पर भी बीमा भुगतान से मना नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

Mon, 09 Oct 2017 12:36 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट
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बीमा भुगतान से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दावे में देरी होने का कारण अगर संतोषजनक हो तो क्लेम का भुगतान करने से मना नहीं किया जा सकता। वाहन चोरी के एक मामले में याचिकाकर्ता को लाभ देते हुए शीर्ष अदालत ने यह बात कही। बीमा कंपनी ने दावा करने में देरी होने का तर्क देकर इस व्यक्ति को क्लेम का भुगतान करने से इनकार कर दिया था।
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जस्टिस आरके अग्रवाल और एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा, ‘एक यांत्रिक तरीके से विशुद्ध तकनीकी आधार पर दावे को खारिज कर देने से बीमा क्षेत्र पर बीमा धारकों का भरोसा कमजोर होगा।’ कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब उसने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) की उस व्यवस्था के खिलाफ याचिकाकर्ता की अपील को सही माना जिसमें आयोग ने कहा था कि क्लेम फाइल करने में देरी होने पर इंश्योरेंस कंपनियां बीमा कवर का लाभ देने से मना कर सकती हैं। 

पढ़ें- एक्सीडेंट की वजह नशा तो इंश्योरेंस कंपनी नहीं देगी मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को हिसार के रहने वाले उस व्यक्ति को 8.35 लाख रुपये की बीमा राशि का भुगतान करने को कहा है, जिसका ट्रक चोरी हो गया था लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम फाइल करने में देरी को आधार बनाकर उसका आवेदन खारिज कर दिया था। 
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कानून उपभोक्ता के हितों की रक्षा के लिए --

सुप्रीम कोर्ट
बेंच ने कहा, यदि दावा करने में देरी होने के कारणों को संतोषजनक ढंग से बताया गया है तो दावे को देरी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। यहां यह कहना भी जरूरी है कि ऐसे वास्तविक दावों को खारिज करना उचित और तर्कसंगत नहीं होगा, जिनका जांचकर्ताओं ने सत्यापन किया है और उन्हें सही पाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य उपभोक्ता के हितों को बेहतर संरक्षण प्रदान करना है।

वाहन खोते ही बीमा कंपनी के पास नहीं आएगा कोई 
अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का वाहन खो जाएगा तो वह सीधे क्षतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी के पास नहीं आएगा। वह पहले अपने वाहन का पता लगाने का प्रयास करेगा। यह सही है कि मालिक को वाहन चोरी होने की सूचना इंश्योरेंस कंपनी को तुरंत देनी चाहिए।

हालांकि इस शर्त के आधार पर वास्तविक दावों को ठुकराया नहीं जा सकता है, खासकर जब सूचना देने या दस्तावेज जमा कराने में हुई देरी की स्थितियां अपरिहार्य हों। क्लेम को ठुकराने के बीमा कंपनी के फैसले का वैध आधार होना चाहिए।

क्या है मामला -
 हिसार के रहने वाले ओम प्रकाश का ट्रक 23 मार्च 2010 को राजस्थान के भिवाड़ी से चोरी हो गया था। लेकिन उन्हें बीमा कंपनी से क्लेम लेने के लिए दावा 31 मार्च को किया। इस दौरान वह अपने ट्रक को खोजते रहे। जांचकर्ताओं ने ट्रक चोरी होने की पुष्टि की और कार्पोरेट क्लेम मैनेजरों ने 7.85 लाख रुपये का दावे की स्वीकार कर लिया।

हालांकि बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम का भुगतान करने से इनकार कर दिया कि दावाकर्ता ने पॉलिसी के उस नियम का उल्लंघन किया है, जिसके मुताबिक बीमा धारक को एक्सीडेंट होने अथवा वाहन को नुकसान पहुंचने की स्थिति में तुरंत बीमा कंपनी को सूचित करना होता है।
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