बीमा भुगतान से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दावे में देरी होने का कारण अगर संतोषजनक हो तो क्लेम का भुगतान करने से मना नहीं किया जा सकता। वाहन चोरी के एक मामले में याचिकाकर्ता को लाभ देते हुए शीर्ष अदालत ने यह बात कही। बीमा कंपनी ने दावा करने में देरी होने का तर्क देकर इस व्यक्ति को क्लेम का भुगतान करने से इनकार कर दिया था।
जस्टिस आरके अग्रवाल और एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा, ‘एक यांत्रिक तरीके से विशुद्ध तकनीकी आधार पर दावे को खारिज कर देने से बीमा क्षेत्र पर बीमा धारकों का भरोसा कमजोर होगा।’ कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब उसने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) की उस व्यवस्था के खिलाफ याचिकाकर्ता की अपील को सही माना जिसमें आयोग ने कहा था कि क्लेम फाइल करने में देरी होने पर इंश्योरेंस कंपनियां बीमा कवर का लाभ देने से मना कर सकती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को हिसार के रहने वाले उस व्यक्ति को 8.35 लाख रुपये की बीमा राशि का भुगतान करने को कहा है, जिसका ट्रक चोरी हो गया था लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम फाइल करने में देरी को आधार बनाकर उसका आवेदन खारिज कर दिया था।