सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस अर्जी को खारिज कर दिया जिसमे एक ही बार में NEET परीक्षा कराने की बात कही गई थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि इस बार राज्य सरकारों को एमबीबीएस और बीडीएस की परीक्षा अलग-अलग कराने की अनुमति दी जाए। सुप्रीम कोर्ट में एटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा 'दो चरणों में होने वाली नीट परीक्षा की जगह 24 जुलाई को सिर्फ एक ही परीक्षा कराई जाए।
Centre seeks SC's nod for allowing state govts to hold a separate test for MBBS and BDS courses.
— Press Trust of India (@PTI_News) April 29, 2016
Attorney General suggests that instead of a two-phased NEET, it can be held on one day on July 24.
— Press Trust of India (@PTI_News) April 29, 2016
AG says states which have conducted the exams or are scheduled to hold the test should be allowed to go ahead.
— Press Trust of India (@PTI_News) April 29, 2016
आपको बताते चले कि सुप्रीम कोर्ट ने तमाम आपत्तियों को दरकिनार करते हुए इसी साल से नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (एनईईटी) के आयोजन को हरी झंडी दे दी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से आयोजित यह परीक्षा दो चरणों में होगी। एक मई को होने वाले एआईपीएमटी को पहला चरण माना जाएगा, जबकि दूसरे चरण का आयोजन 24 जुलाई को होगा। जो छात्र इस परीक्षा के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं, उनके पास दूसरे चरण में मौका होगा। संयुक्त प्रवेश परीक्षा में करीब आठ लाख अभ्यर्थियों के बैठने की उम्मीद है।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस और परास्नातक कोर्स में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा इसी वर्ष से आयोजित करने का आदेश दिया है।
पीठ ने परीक्षा के प्रस्तावित कार्यक्रम को स्वीकार कर लिया है। दूसरे चरण की परीक्षा के लिए नए सिरे से आवेदन मंगाए जाएंगे। 17 अगस्त तक परीक्षा के नतीजे घोषित हो जाएंगे और इसके बाद 45 दिनों के भीतर काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। 30 सितंबर तक परीक्षा की सभी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
आदेश का मतलब
यह आदेश देश भर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों, डीम्ड विश्वविद्यालयों और निजी मेडिकल कॉलेजों पर लागू होगा। जहां पर मेडिकल में प्रवेश के लिए पहले ही परीक्षा हो चुकी है या होने वाली है, वहां भी सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश प्रभावी होगा। उच्चतम न्यायालय के फैसले से सरकार की 21 दिसंबर 2010 को जारी वह अधिसूचना फिर से प्रभावी हो गई है, जिसमें एक प्रवेश परीक्षा की बात की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कोई हाईकोर्ट दखल नहीं दे सकता। यदि कोई अपील आती है तो वह सीधे शीर्ष अदालत के समक्ष पेश होगी।