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CDS Gen Anil Chauhan: सीडीएस बोले- हमारे पड़ोस में अस्थिरता चिंता का कारण, भारत के लिए तीन मोर्चों पर चुनौती

Fri, 09 Aug 2024 02:15 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि भारत के पड़ोस में अस्थिरता के कारण चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस समय मजबूत सशस्त्र बल देश के लिए अनिवार्य हो है। 
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सीडीएस अनिल चौहान - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान ने छद्म युद्ध छेड़ रखा है, जबकि चीन के साथ लंबे समय से सीमा विवाद दो प्रमुख सुरक्षा चुनौती हैं। वहीं हमारे पड़ोस में अस्थिरता देश के लिए चिंता कारण है। सीडीएस का यह बयान तब आया है, जब पड़ोसी देश बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता चल रही है।

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जनरल चौहान गुरुवार को नई दिल्ली में उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।  उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक वातावरण परिवर्तन की स्थिति में है।

सीडीएस ने कहा, ‘मेरा मानना है कि हम बड़े वैश्विक व्यवधान के युग से गुजर रहे हैं। इसमें तकनीकी व्यवधान, आर्थिक, पर्यावरण शामिल है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, जनसांख्यिकीय, लोगों का प्रवास दुनिया के लिए चिंता का कारण है।"
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जनरल चौहान ने जोर देते हुए कहा कि मजबूत सशस्त्र बल इस समय देश के लिए आवश्यक ही नहीं बल्कि अनिवार्य भी है। स्वदेशी क्षमताएं न केवल रक्षा उद्योग के लिए बल्कि रक्षा कूटनीति के लिए भी नए रास्ते खोल सकती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश के लिए जहां सुरक्षा संबंधी बहुत सारी समस्याएं हैं। देश युद्ध और आजीविका के लिए विदेशी आयात पर निर्भर नहीं रह सकता है। खासकर ऐसे माहौल में जहां वैश्विक सुरक्षा माहौल अस्थिर है और हमारी बड़ी सरहदें हैं।

सीडीएस ने कहा, "भारत की 'आत्मनिर्भरता' की खोज रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए जरूरी है।"



चीन की तुलना में भारत का बजट काफी कम
भारत के सामने मोर्चे पर एक तरफ पाकिस्तान है तो दूसरी तरफ चीन। जबकि रक्षा बजट के मामले में भारत चीन की तुलना में उसका दसवां हिस्सा खर्च करता है। चीन के पास ड्रोन्स, पांचवीं पीढ़ी के फाइटरजेट, अत्याधुनिक तकनीक के हथियार, रेडार, निगरानी के उन्नत उपकरण, वायु रक्षा प्रणाली समेत अन्य हैं। वह ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स में अब अमेरिका के बाद अपनी जगह बनाता जा रहा है। हालांकि भारत के पास सैन्यबल, युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों का काफी अधिक अनुभव है।

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