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अखलाक कांड: शहीद सुबोध सिंह ने किया था खुलासा, अखिलेश सरकार ने मीट सैंपल बदलने का बनाया था दबाव

Fri, 07 Dec 2018 03:23 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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inspector subodh kumar - फोटो : अमर उजाला
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बुलंदशहर की उन्मादी भीड़ के हाथों मारे गए कोतवाल सुबोध कुमार सिंह ने कुछ महीने पहले एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया था कि अखलाक हत्याकांड की जांच के दौरान तत्कालीन अखिलेश सरकार ने उन पर मीट सैंपल बदलने का दबाव बनाया था। सुबोध सिंह गोमांस के शक में भीड़ हिंसा के शिकार हुए दादरी के अखलाक कांड की जांच कर रहे थे। 

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इंटरव्यू में सुबोध सिंह ने कई और चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उन्होंने बताया कि तत्कालीन अखिलेश सरकार ने पशु चिकित्सालय और एफएसएल जांच के नतीजे बदलने के लिए दिन-रात एक कर दिए थे। अखलाक गोहत्या का आरोपी था और उसके पास गोमांस पाए गए थे। उस समय सिंह जारचा पुलिस थाना प्रभारी थे।

 जांच के दौरान उन्होंने इस मामले में 10 लोगों को तत्काल गिरफ्तार कर मामले को सांप्रदायिक विद्वेष से बचाने कोशिश की थी। इसके बाद उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के आरोप में 18 लोगों को गिरफ्तार किया था। लेकिन मामले के 40 दिन के अंदर ही अचानक उन्हें जांच से हटा दिया गया। 
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सिंह का कहना था कि दरअसल अखिलेश सरकार इस मामले को सियासी और सांप्रदायिक रंग देना चाहती थी। लेकिन सिंह सरकार द्वारा उन पर डाले जा रहे प्रशासनिक दबाव में नहीं आए और उनका तबादला कर दिया गया। सिंह ने बताया, उस समय की समाजवादी पार्टी की सरकार चाहती थी कि हम लोगों और डॉक्टर पर दबाव बनाकर मीट के सैंपल को बदल दिया जाए। 

हम लोगों ने घटनास्थल से जो मीट लिया था, सरकार चाहती थी कि उसकी जगह भैंस का मीट रख दिया जाए। हमने तो मना कर दिया कि हम नहीं कर पाएंगे। हमने कहा कि घटनास्थल से उठाया गया मीट तीन जार में रखा गया है। एक जार थाने में है, एक एफएसएल और एक डॉक्टर के पास जा चुका था।

अगर हम उसे बदलते तो धारा 201-218 के मुल्जिम बनते। इसी वजह से मेरा तबादला भी हुआ था। दोनों धाराएं सबूत से छेड़छाड़ के मामले में लगती हैं जिसके तहत तीन से दस साल तक की कैद हो सकती है। उन्होंने इंटरव्यू में बताया, असलियत यह है कि डॉक्टर से रिपोर्ट बदलवा ली गई थी। मैं बता रहा हूं कि पशु चिकित्सक पर दबाव डालकर यह सब करवा लिया गया था। डॉक्टर ने भी प्रथमदृष्टया रिपोर्ट दी थी कि गाय का ही मीट है। 

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