भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष कोई नई बात नहीं। हालांकि, भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। 80 घंटे से अधिक समय तक चले टकराव के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार शाम पांच बजे से संघर्ष विराम हो गया, लेकिन कुछ ही घंटों के बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर कायराना हरकत करते हुए संघर्ष विराम का उल्लंघन भी किया। सीमा पर फिलहाल माहौल तनावपूर्ण है। संघर्ष विराम को लेकर पाकिस्तान का रुख कटघरे में है। अब सरकार की ओर से पिछले चार दिनों के पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी साझा की गई है। जिसमें ये सामने आया कि सेना के जोरदार हमले के बाद कैसे पाकिस्तान अमेरिका के सामने संघर्ष विराम की गुहार लगाने पहुंचा। बाद में भारत अपनी शर्तों पर संघर्ष विराम समझौते के लिए राजी हुआ।
भारत का पाकिस्तान पर पहला प्रहार: बहावलपुर में आतंकी ठिकाना नेस्तनाबूद करना घर में घुसकर फन कुचलने जैसा
भारतीय सशस्त्र बलों ने जब सात मई को 1.05-1.25 बजे के बीच 25 मिनट के अंदर नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए। यह भारत का पहला प्रहार था, जिसने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी- आईएसआई से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय- मुरीदके, जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर- बहावलपुर के आतंकी शिविरों पर हमला पड़ोसी देश के लिए चौंकाने वाला था। भारतीय सेना ने इस ठिकाने पर सबसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिसने आतंकियों की रीढ़ तोड़ दी। सूत्रों बताया कि सैन्य स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था "इन लोगों को मिट्टी में मिला दो। सशस्त्रबलों की ओर से की गई भीषण कार्रवाई में बहावलपुर, मुरिदके और मुजफ़्फराबाद के कैंप को मिट्टी में मिला दिया। पाकिस्तान के हालात हर दौर के बाद बदतर होते गए। युद्ध के हर चक्र में वह परास्त हुआ। पाकिस्तान स्थित वायुसेना ठिकानों पर हमलों के बाद उसे समझ आया कि वह दौड़ में ही नहीं है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि सुरक्षित तो आप भी नहीं हैं।
दूसरा प्रहार: सैन्य ठिकानों पर तबाही बरसाकर पाकिस्तान की तोड़ी कमर
सात मई को हुए भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के नागरिकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। पाकिस्तान की ओर से किए गए इन नाकाम हमलों का भारत की ओर से कड़ा जवाब दिया गया। सूत्रों की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, सेना द्वारा आतंकी शिवरों पर हमले बहुत ही सटीकता से किए गए थे। पाकिस्तान में रहीमयार खान एयरबेस का रनवे पूरी तरह से समतल हो गया था। चकलाला स्थित पाकिस्तानी वायुसेना बेस नूर खान पर भी बुरा हाल हुआ। तकनीकी और सैन्य क्षमताओं के बीच बड़ा अंतर था। भारत और पाकिस्तान के बीच बहुत बड़ा अंतर था। पाकिस्तान को एहसास हो गया था कि वे उस श्रेणी में नहीं हैं। भारत ने अपनी मर्जी से जवाबी प्रहार किया और पाकिस्तान के हमलों को नाकाम कर दिया गया। पाकिस्तान को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर पर सूत्रों ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में टर्निंग प्वाइंट 9 और 10 मई की कार्रवाई थी। 9 मई को भारत द्वारा हवाई हमले किए गए और 10 मई को भारत की ओर से तबाही मचाने वाला जोरदार हमला किया। जिसने पाकिस्तान के हौसले तोड़ दिए और वह घुटनों पर आने को मजबूर हो गया।
तीसरी और सबसे जोरदार प्रहार: किसी तीसरे की दखल बर्दाश्त नहीं करेगा भारत
भारत की ओर से आतंकवादियों के अड्डों पर किए जा रहे जोरदार हमलों के चलते 10 मई आते-आते शहबाज शरीफ और असीम मुनीर के हौसले पस्त हो गए। भारत की ओर से मचाई गई भीषण तबाही के बाद पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष असीम मुनीर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के पास गुहार लगाने पहुंच गए। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष असीम मुनीर से बात करने के बाद मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को फोन किया और बताया कि पाकिस्तान बातचीत के लिए तैयार है। सूत्रों ने बताया कि, भारत ने साफ कर दिया कि बातचीत डीजीएमओ के बीच ही होनी चाहिए, किसी और के बीच नहीं। पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से 10 मई को दोपहर 1 बजे मिलने का समय मांगा। गौरतलब है कि भारत ने 7 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ को बताया था कि उसने पाकिस्तान में आतंकी ढांचे पर हमला किया है, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने भारत द्वारा हवाई ठिकानों पर हमला करने के बाद समय मांगा था।
ये भी पढ़ें: 'वहां से गोली चलेगी तो यहां से गोला चलेगा': प्रधानमंत्री मोदी ने दिए थे स्पष्ट निर्देश
सिर्फ डीजीएमओ स्तर पर होगी बात
पाकिस्तान की गुहार के बाद भारत संघर्ष विराम के लिए मान गया, लेकिन पाकिस्तान ने संघर्ष विराम के कुछ घंटों के बाद आपने नापाक इरादे जाहिर कर दिए। कई जगहों पर फिर से हमले की कोशिश की। सूत्रों का कहना है कि, भारत और पाकिस्तान के बीच कोई राजनयिक वार्ता फिलहाल नहीं हो रही है। सिर्फ दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों डायरेक्टर जनरल्स ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (डीजीएमओ) के बीच संपर्क हुआ है ताकि सीमा पर स्थिति को संभाला जा सके। इसके साथ ही भारत का संदेश बिल्कुल साफ है- अब अगर पाकिस्तान गोली चलाएगा, तो भारत दोगुनी ताकत से जवाब देगा। और जब तक पीओके का मुद्दा हल नहीं होता, तब तक कोई भी बातचीत, मेल-मिलाप या समझौता संभव नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर पर हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। अब केवल एक ही मामला बचा है- पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की वापसी। इसके अलावा और कोई बात नहीं है। अगर वे आतंकवादियों को सौंपने की बात करते हैं तो हम बात कर सकते हैं। हमारा किसी और विषय पर कोई इरादा नहीं है। हम नहीं चाहते कि कोई मध्यस्थता करे। हमें किसी की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच सरकारी सूत्रों ने साफ कर दिया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अब भी जारी है। यह कोई एक दिन की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि अब इसे भारत-पाक रिश्तों का नया दौर कहा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह स्थिति अब स्थायी रूप से बनी रहेगी और दुनिया को इसे 'नए सामान्य' की तरह स्वीकार करना होगा।