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INS Vindhyagiri-MV Nordlake collision: बॉम्बे HC से केंद्र को झटका, जर्मन कंपनी की देनदारी 30 करोड़ तक सीमित

Wed, 22 Feb 2023 09:31 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

अदालत ने कहा कि एसडीआर की मूल राशि पर 30 जनवरी, 2011 (टक्कर की तारीख) से फरवरी 2023 तक 12.75 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज लगेगा।
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारतीय नौसैनिक जहाज आईएनएस विंध्यगिरि और व्यापारिक जहाज एमवी नोर्डलेक के बीच हुई टक्कर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारत सरकार को बड़ा झटका दिया है। टक्कर के बाद आईएनएस विंध्यगिरि के डूब जाने के 12 साल बाद न्यायालय ने जर्मन कंपनी एमवी नोर्डलेक जीएमबीएच की देनदारी को 30 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया है। 

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न्यायमूर्ति एन जे जमादार की एकल पीठ ने पिछले सप्ताह पारित एक आदेश में कहा जहाज मालिक का मर्चेंट शिपिंग अधिनियम की धारा 352ए के तहत अपनी देयता को सीमित करने का अधिकार था। कोर्ट ने टक्कर के बाद हुए नुकसान के केंद्र सरकार के 1,397 करोड़ रुपये के दावे के खिलाफ मर्चेंट मवी नोर्डलेक के मालिक की देनदारी को 30 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया। 

अदालत ने कहा कि एसडीआर की मूल राशि पर 30 जनवरी, 2011 (टक्कर की तारीख) से फरवरी 2023 तक 12.75 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज लगेगा। पीठ ने, हालांकि छह सप्ताह के लिए अपने आदेश पर रोक लगा दी, जिससे केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सके।
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क्या है मामला 
30 जनवरी, 2011 को एमवी नोर्डलेक मुंबई बंदरगाह से बाहर निकल रहा था। उसी समय युद्धपोत आईएनएस विंध्यगिरि सहित नौसेना के 14 जहाजों का एक काफिला बंदरगाह में प्रवेश कर रहा था। इसी दौरान एमवी नोर्डलेक और आईएनएस विंध्यगिरि टकरा गए, जिसके बाद आईएनएस विंध्यगिरि डूब गया। इस घटना के बाद जर्मन कंपनी के स्वामित्व वाले एमवी नोर्डलेक ने दावा किया कि और आईएनएस विंध्यगिरि और काफिले में एक अन्य जहाज उनके बाईं ओर नहीं गया जो सहमत योजना के विपरीत था। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने एमवी नोर्डलेक के खिलाफ मुकदमा दायर किया और 1,397 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा किया। जहाज के मालिक ने 2014 में अपनी देनदारी को सीमित करने के लिए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी।

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