जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने शनिवार को कहा कि भारत का विकास एक बहुआयामी दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें सुधार, डिजिटल नवाचार, हरित पहल और मजबूत बुनियादी ढांचे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलुओं ने न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नया आकार दिया है, बल्कि इसे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया है।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के एक कार्यक्रम में कांत ने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया का ध्यान विकसित हो रहे देशों ग्लोबल साउथ पर केंद्रित हो रहा है, भारत की निरंतर प्रगति वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगी।
जर्मनी-जापान से होगा भारत
कार्यक्रम में कांत ने आगे कहा कि भारत, जो वर्तमान में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, उसकी विकास कहानी नवाचार और रणनीतिक सुधारों से प्रेरित है। ये सुधार भारत को 2027 तक जर्मनी और जापान से भी आगे ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया को तेजी से बढ़ना है, तो इस साल वैश्विक विकास का 75-80 प्रतिशत हिस्सा ग्लोबल साउथ से आएगा।
आईएमएफ के आकड़े
बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आकड़े के अनुसार इस वर्ष दुनिया की 75-80 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि ग्लोबल साउथ से होगी, और इसमें भारत और इंडोनेशिया सबसे आगे होंगे।
विश्व बैंक के आकड़े का किया जिक्र
साथ ही अमिताभ कांत ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक का अनुमान है कि अगले 30 वर्षों में वैश्विक विकास का तीन-चौथाई हिस्सा ग्लोबल साउथ से होगा, जो युवा और गतिशील जनसंख्या द्वारा संचालित होगा। इसके विपरीत, यूरोप में आबादी बूढ़ी हो रही है, और अमेरिका पहले ही इस स्थिति में पहुंच चुका है।
भारत ने एक दशक में बहुत बड़ा बदलाव किया-कांत
कांत ने यह भी बताया कि भारत ने एक दशक में बहुत बड़ा बदलाव किया है। अब हम वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बन चुका है। इस बदलाव के पीछे कई संरचनात्मक सुधार हैं, जैसे जीएसटी, दिवाला और दिवालियापन संहिता, रियल एस्टेट नियमन और व्यापार में आसानी के सुधार। ये सुधार भारत को स्थिर और प्रतिस्पर्धी विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।