केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया महिला उद्यमियों को आकर्षित करने में विफल होती दिख रही है। 8 जनवरी, 2020 तक देश के 27,084 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में महज 43 फीसदी में ही महिला निदेशक की उपस्थिति थी।
इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कुल मिलाकर स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं के लिए कोई उत्साहजनक वातावरण नहीं है। महिलाओं में क्रेडिट सपोर्ट की कमी महसूस की जा रही है। वित्तीय रूप से वे पुरुषों के समान जोखिम भी नहीं उठा सकती हैं।
नए स्टार्टअप में महिला उद्यमियों को संस्थानिक समर्थन (इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट) भी नहीं मिल पाता है। यहां तक कि छोटी-छोटी दिक्कतों में भी उन्हें वित्तीय समर्थन से हाथ धोना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार मान रही है कि स्टार्टअप आर्थिक विकास और नवोन्मेष संस्कृति को गति दे रहे हैं। रोजगार के अधिक अवसर पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रत्यक्ष रूप से महिलाओं को पर्याप्त मदद अब भी नहीं मिल पा रही है।