मोदी की डिग्री का रिकॉर्ड दिखाने का आदेश देने वाले सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु की भूमिका बदला जाना हैरत में डालने वाला है। क्योंकि केन्द्रीय सूचना आयोग(सीआईसी) में कार्यरत 10 सूचना आयुक्तों में बेहतर रहा है। वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा मामलों का निस्तारण करने वाले यही सूचना आयुक्त हैं। यही नहीं भाजपा नेता विजेन्द्र गुप्ता की पत्नी का पेंशन घोटाला आचार्युलु ने सुनवाई के दौरान ही पकड़ लिया था। इसके अलावा आरटीआई के दायरे में आने के मामले की सुनवाई में इन्होंने ने ही राष्ट्रीय पार्टियों को सीआईसी में तलब करवाया था।
करीब आठ माह पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री का ब्यौरा सार्वजनिक करने का आदेश देने के बाद चर्चा में आए सीआईसी के सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु अब फिर चर्चा में हैं। हाल ही में इन्होंने फिर से दिल्ली विश्वविद्यालय को जानकारी देने का आदेश दिया। इसके ठीक बाद इनकी सीआईसी में जिम्मेदारी बदल दी गई। आचार्युलु उस समय भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान ही दिल्ली के भाजपा नेता और विधायक विजेन्द्र गुप्ता की पत्नी का पेंशन घोटाला पकड़ा था।
इसके बाद यह मामला लोकसभा और दिल्ली विधानसभा में जमकर उछला था। इसके अलावा गौर करने की बात यह है कि श्रीधर आचार्युलु एक मात्र ऐसे सूचना आयुक्त हैं जो गैर ब्यूरोक्रेट पृष्टभूमि के हैं। ये कानून और पत्रकारिकता की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि सूचना आयुक्त बसंत सेठ बैंकिंग क्षेत्र के प्राफेशनल जरूर हैं। इसके अलावा मुख्य सूचना आयुक्त को मिलाकर आठ सूचना आयुक्तों की पृष्ठभूमि ब्यूरोक्रेट से संबंधी रही है।
इसके अलावा वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा केस का निस्तारण आचार्युलु ने सीआईसी में किया था। वर्ष 2016 में इन्होंने 3197 मामलों का निस्तारण किया। इसके बाद सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद ने 3193 केस का निस्तारण किया। उधर, लंबित मामलों की बात करें तो एमए खान (181 केस) और बिमल जुल्का (415 केस) के बाद आचार्युलु(633 केस) के पास ही सबसे कम मामले लंबित हैं। बाकी के सात सूचना आयुक्तों और मुख्य सूचना आयुक्तों के पास आचार्युलु से भी ज्यादा मामले लंबित हैं।