मई-जून में अत्यधिक गर्मी और इसके बाद असम में लगातार बाढ़ के कारण उत्पादन में कमी आ रही है। वहीं, सरकार की ओर से 20 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से भी उत्पादन प्रभावित हुआ है। मई में भारत का चाय उत्पादन एक साल पहले की तुलना में 30 फीसदी से अधिक गिरकर 90.92 मिलियन किलोग्राम रह गया है।
चाय के व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि मई और जून महीने में भीषण गर्मी पड़ने की वजह से चाय की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। चाय की कीमत और भी ऊंची रहेंगी, क्योंकि कटाई के मौसम में गर्मी और बाढ़ के कारण प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन में कमी आई है। कीमतों में यह उछाल संकट से जूझ रहे भारतीय चाय उद्योग के लिए राहत लेकर आई है। क्योंकि पिछले एक दशक में चाय की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच बढ़ती उत्पादन लागत से जूझ रहा है।
20 फीसदी तक बढ़े चाय के दाम
चाय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार जून के आखिरी हफ्ते में औसत चाय की कीमत बढ़कर 217.53 रुपये (2.61 डॉलर) प्रति किलोग्राम हो गईं, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 20 फीसदी अधिक है। अप्रैल में अच्छी मांग के बावजूद गर्मी की वजह से उत्पादन में कमी आने के बाद चाय की कीमतों में उछाल आया है। जून में चाय का उत्पादन बेहतर हुआ है, लेकिन असम में आई बाढ़ की वजह से कई जिलों में चाय की तुड़ाई फिलहाल कम हो रही है।
जानकारों का कहना है कि भारत के कुल चाय उत्पादन का आधे से अधिक हिस्सा जुलाई से अक्तूबर के दौरान तोड़ा जाता है। 2024 में औसत चाय की कीमतें पिछले साल की तुलना में 16 फीसदी से 20 फीसदी तक अधिक हो सकती हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार 2024 के पहले चार महीनों में भारत का चाय निर्यात एक साल पहले की तुलना में 37 फीसदी बढ़कर 92 मिलियन किलोग्राम हो गया है। सर्वाधिक चाय निर्यात से मिस्र और यूनाइटेड किंगडम, इराक, ईरान और रूस को की जाती है।