देश में इन दिनों भारी बारिश और बाढ़ ने कहर मचाया हुआ है। तेज बारिश की वजह से फसलों पर बुरा असर पड़ा है और सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में बीते एक हफ्ते में सब्जियों के भाव करीब दोगुना हो गए हैं। तेज बारिश और बाढ़ की वजह से न केवल कई जगह फसलें नष्ट हुई हैं साथ ही सप्लाई चेन भी टूटी है। जब तक सप्लाई चेन में सुधार नहीं आ जाता जब तक सब्जियों के भाव तेज ही रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ का पानी घटने लगा है, लेकिन इससे राजधानी के आसपास के पड़ोसी राज्यों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिसकी वजह से आने वाले दिनों में कीमत में और तेजी आने की संभावना है।
दरअसल,दिल्ली-एनसीआर को सब्जियों की सप्लाई करने वाले क्षेत्र बाढ़ में घिरे हुए हैं इससे कई जगह फसलें बर्बाद हुई हैं। पंजाब और हिमाचल से सप्लाई में 40 फीसदी तक का असर देखने को मिला है। दिल्ली के आसपास कई जगहों पर यमुना के किनारे सब्जियां उगाई जाती हैं। यहां बाढ़ से फसलें नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा कई जगह रास्ते नष्ट होने से दूसरी जगहों से आने वाली सब्जियों की सप्लाई घटी है। सब्जियों की डिमांड के मुकाबले सप्लाई में तेज गिरावट से कीमतें तेजी के साथ बढ़ी हैं।
सब्जी 2 सितंबर 9 सितंबर बदलाव का प्रतिशत
टमाटर 2,311 2,578 11.6
शिमला मिर्च 2,311 2,578 11.6
धनिया पत्ती 4,750 5,500 15.8
भिंडी 1,700 1,700 0.0
लौकी 1,200 1,500 25.0
हरी मिर्च 2,500 2,850 14.0
बींस 5,750 6,250 8.7
आलू 1,240 1,240 0.0
बैंगन 1,267 1,700 34.2
प्याज 1,281 1,281 0.0
आंकडे: एगमार्कनेट डॉट जीओवी.डॉट आईएस रुपए प्रति क्विंटल में
आजादपुर सब्जी मंडी के कारोबारियों का कहना है कि, मानसून के मौसम में सब्जियों के भाव में तेजी आना नई बात नहीं है। बारिश थमने के साथ ही सब्जियों की सप्लाई धीरे धीरे बढ़ने लगती है और भाव नियंत्रित आ जाते हैं। लेकिन इस बार बारिश का कहर कई राज्यों में काफी ज्यादा रहा है। ऐसे में कुछ वक्त तक कीमतों का दबाव बना रह सकता है।
देश के प्रमुख शहरों में सब्जियों की कीमत बढ़ने के खाद्य महंगाई दर पर इसका असर पड़ सकता है। उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2 से 9 सितंबर के बीच प्रमुख हरी सब्जियों की कीमत 11 से 34 प्रतिशत तक बढ़ी है। इसकी वजह पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से आपूर्ति में व्यवधान और फसलों को हुआ नुकसान है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त में पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भारी बारिश से चिंता बढ़ गई है। पंजाब में दशकों की भीषण बाढ़ आई है और इससे धान, कपास और पत्ता गोभी की फसल प्रभावित हुई है। वहीं राजस्थान में भी मक्का, कपास, बाजरा, ज्वार, हरा चना और काला चना की उपज को जोखिम है। अन्य राज्यों में इसका असर स्थानीय स्तर पर है।