भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मातृ शिक्षा दर बढ़ने से पांच वर्ष की आयु के बच्चों में मृत्यु के मामलों में कमी आई है। ‘हेल्थ एंड प्लेस’ में प्रकाशित अध्ययन में यह दावा किया गया है।
अध्ययन के अनुसार, पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर की गणना एक प्रश्नावली से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल करके की गई थी। इसमें महिलाओं के गर्भधारण से जुड़ी जानकारी शामिल थी। शोधकर्ताओं ने कहा कि अध्ययन के दौरान मातृ शिक्षा दर में वृद्धि और नवजात शिशुओं की मृत्यु के मामले में कमी के बीच संबंध पाया गया है।
ऑस्ट्रिया के ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एप्लाइड सिस्टम्स एनालिसिस’ (आईआईएएसए) के प्रो. समीर केसी ने कहा, विकासशील देशों में भविष्य की जनसंख्या की गतिशीलता को समझने के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि शिक्षा पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को कैसे प्रभावित करती है। अध्ययन में 1992 से 1993 और 2019 से 2021 के बीच आयोजित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का पांच दौर का विश्लेषण किया गया।
शिक्षित महिलाओं के बच्चों की मृत्यु दर में अंतर
केसी ने कहा, हमने पाया कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाली माध्यमिक शिक्षा हासिल करने वाली महिलाओं के बच्चों और समान रूप से शिक्षित ग्रामीण महिलाओं के बच्चों की मृत्यु दर में अंतर था। शहरी महिलाओं के इस उम्र के बच्चों में मृत्यु दर कम थी। हालांकि, हमने हाल के सर्वेक्षणों में ऐसा नहीं देखा।
यह निकला निष्कर्ष
शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि कुल मिलाकर मातृ शिक्षा खासकर माध्यमिक शिक्षा, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को रोकने के लिए एक सुरक्षात्मक कारक है।
बेटियों के लिए माध्यमिक शिक्षा पर खास ध्यान
केसी ने कहा, वर्तमान नीतियां सही प्रतीत होती हैं, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेटियों के लिए माध्यमिक शिक्षा पर खास ध्यान देने के साथ शैक्षिक अवसरों को बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही भारत में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हम पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में आई कमी को आगे भी कायम रख पाएं।