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'राम सभी धर्मों के नबी, मंदिर निर्माण में हर नागरिक करे सहयोग'

Sat, 11 Jun 2016 04:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
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राम सभी धर्मों के लोगों के नबी हैं। उनके मंदिर के निर्माण के लिए सभी भारतीयों को आगे आना चाहिए। राममंदिर का निर्माण कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। यह कहना है आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक ने इंद्रेश कुमार का। इंद्रेश कुमार संघ के प्रशिक्षण कैंप में शामिल होने आए हैं।
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इंद्रेश कुमार ने कैंप के आखिरी दिन पत्रकारों से बातचीत में कहा कि  राम मंदिर निर्माण पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि राममंदिर निर्माण कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। उसके निर्माण के अलग तरीके हो सकते हैं, लेकिन सबसे अच्छा रास्ता देश के 125 करोड़ लोगों में आम सहमति बनाना है। अगर इतिहास उठाकर देखेंगे तो देश के हर धर्म के पूर्वज राम से जुड़े हैं। वे सभी धर्मों के नबी हैं। संपूर्ण सृष्टि के मालिक हैं।

इसलिए देश में ऐसा माहौल होना चाहिए कि सभी धर्म संप्रदाय आकर मंदिर निर्माण करें। उन्होंने कहा हमें अपने धर्म को मानने के  साथ ही दूसरे के धर्म का भी सम्मान करना चाहिए। यही कारण है कि संघ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच चला रहा है। जो 23 राज्यों के 318 जिलों में संचालित है। लाखों मुस्लिम भाई इससे जुड़े हैं जो भारत की एकता और अखंडता के लिए काम कर रहे हैं।
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अखलाक मुद्दे पर राजनीति करने वाले मांगें माफी
अखलाक मुद्दे पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि जो हुआ वह गलत था। लेकिन अब रिपोर्ट आने के बाद जो भी हो रहा है वह भी गलत है। उसे समय इस मुद्दे को राजनीतिक बनाने वालों को राजनीति करना बंद कर देना चाहिए। उन्हें इस घटना पर अफसोस व्यक्त करते हुए माफी मांगनी चाहिए। उन लोगों को भी माफी मांगनी चाहिए जिन्होंने देश विदेश में भारत की छवि बिगाड़ने की कोशिश की थी।

मुस्लिम भी करें गोमांस का बहिष्कार
गो-मांस के मुद्दे का समर्थन करने वाले देश के मुस्लिमों का गुमराह कर रहे हैं। कुरान के सबसे बड़े अध्याय सुरा उल बकर में रोग और उसके उपचार के बारे में लिखा गया है। कहा गया है कि बकर (गाय) बीमारियों से बचाव का नेतृत्व करती है। इसलिए हमें उसके दूध का सेवन करना चाहिए ना कि बीफ का। 

संघ को बदनाम करने वाले गए गर्त में
संघ पर आतंकवादी होने का आरोप लगाते हुए उसे गाली देने का काम कांग्रेस आजादी के बाद से कर रही है। लेकिन उसकी साजिश कभी कामयाब नहीं हो पायी। आजादी से पूर्व अंग्रेजों ने संघ पर बैन लगाया, लेकिन हटाना पड़ा, आजादी के बाद कांग्रेस ने तीन बार बैन लगाया। संघ पर लगे आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। 

कैंप में दी जाती है राष्ट्रवाद की शिक्षा
संघ के प्रशिक्षण शिविरों में राष्ट्रवाद, समभाव और संकट से निपटने की शिक्षा दी जाती है। इसमें संकट और विपरीत परिस्थितियां हो, प्रदूषण हो, ग्लोबल वार्मिंग हो, नशामुक्ति हो, कट्टरता और सांप्रदायिकता से मुक्ति हो शामिल होने चाहिए। देश भर में हर साल प्रशिक्षण शिविर चलाए जाते हैं। इसमें 70 से अधिक शिविर चल रहे हैं। जिसमें हर साल 35 से 40 हजार लोग प्रशिक्षण लेते हैं।
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