मॉक ड्रिल करते एनएसजी कमांडो के जवान
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इससे पहले देश में कब की गई थी मॉक ड्रिल?
भारत में आखिरी बार मॉक ड्रिल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हुई थी। उस समय हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए थे और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सचेत किया गया था। अब करीब 54 साल बाद कल देश में फिर से मॉक ड्रिल के दौरान सायरन बजाए जाएंगे।
सात मई को कैसे की जाएगी मॉक ड्रिल?
गृह मंत्रालय के अनुसार, देश भर में करीब 300 जगहों (शहर और सिविल डिफेंस जिलों में) पर युद्ध के दौरान उत्पन्न होने वाली स्थिति और उनके बचाव के तरीकों को बताने के लिए मॉक ड्रिल किया जाएगा। इन सभी जगहों को तीन कैटेगरी के आधार पर बांटा गया है। जिसमें कैटेगरी -1 में सबसे संवेदनशील जगहें शामिल है, कैटेगरी -2 में संवेदनशील जगहें है और कैटेगरी -3 में कम संवेदनशील जगहों को रखा गया है।
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मॉक ड्रिल के दौरान आपको क्या करना होगा?
मॉक ड्रिल के दौरान आम नागरिकों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा। इस दौरान सायरन बजने पर प्रशासन के सुझाए गए सुरक्षित जगहों पर जाने की तैयारी करना है। वहीं ब्लैकआउट की स्थिति में घर में रहना और घरों की लाइट बंद करना है।
जानें क्या है मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट?
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क्या है मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट?
सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल एक तरह का अभ्यास है, जिसमें युद्ध के दौरान होने वाली स्थिति से निपटना और आम जनता व प्रशासन साथ मिलकर जल्द से जल्द राहत और बचाव अभियान शुरू करना शामिल है। इसका मकसद घायलों की मदद करना, दहशत को कम करना है। जबकि ब्लैकआउट की स्थिति में संभावित हमले वाली जगह के आस-पास के इलाके में लाइटें बंद करना है। ब्लैकआउट का मकसद अंधेरे में इलाके को सुरक्षित रखना और दुश्मन को सटीक निशाना लगाने में विफल करना है।