नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड बदले-बदले से हैं। प्रचंड के बारे में कहा जा रहा है कि दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वह काफी फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। प्रचंड इससे पहले अगस्त 2008 में नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे और नेपाल के तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल रुकमांगद कोटवाल को पद से बर्खास्त करने के प्रयास में उन्हें 4 मई 2009 को इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे में 15-18 सितंबर की उनकी भारत यात्रा से दोनों देशों को काफी उम्मीदें है।
प्रचंड की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आपसी सहमति और विश्वासबहाली के उपायों पर काफी जोर दिए जाने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान शांतिपूर्ण और मजबूत नेपाल की परिकल्पना का स्वरुप लेकर बैठेंगे।
नई दिल्ली के लिए प्रचंड के यह शब्द भी काफी सुकून भरे हैं कि भारत के सहयोग से ही नेपाल का विकास संभव है। प्रचंड ने नेपाल में अपने एक बयान में कहा है कि वह पहले इसे इस तरह से नहीं समझ रहे थे, लेकिन अब उन्हें समझ में आने लगा है।
आया था गतिरोध
पिचले साल भारत और नेपाल के रिश्ते में पेंचीदगियां आ गई थी। संविधान में अपना अधिकार न मिलने के कारण मधेसियों और तराई के लोगों ने भारत से जाने वाले सड़क मार्ग पर अवरोध खड़ा कर दिया था। इसके चलते नेपाल को ईधन-तेल, गैस, दवाओं आदि की होने वाली आपूर्ति बाधित हो गई थी। इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप के दौर भी खूब चले।
समझौता और सहमति के आसार
मोदी और प्रचंड
मोदी को न्यौता, राष्ट्रपति भी जाएंगे
प्रधानमंत्री प्रचंड प्रधानमंत्री मोदी को नेपाल यात्रा का निमंत्रण लेकर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी उनका निमंत्रण स्वीकार करेंगे और उम्मीद की जा रही है कि नवंबर में प्रस्तावित सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की चर्चा होगी। इसके अलावा नवंबर महीने में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नेपाल का दौरा करेंगे।
प्रतिनिधिमंडल
प्रधानमंत्री प्रचंड अपने साथ एक विश्षिट प्रतिनिधि मंडल लेकर भारत आ रहे हैं। इसमें विदेश मंत्री प्रकाश सरन महट और आधारभूत संसाधन और परिवहन मंत्री रमेश लेखाट शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच में आवाजाही, सुरक्षा, हाइड्रोकार्बन समेत अन्य कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। पहले से चल रही परियोजनाओं, भारतीय व्यापारियों, उद्यमियों, कारोबारियों के लिए नेपाल में काम करने के वातावरण समेत अन्य मुद्दे इसमें शामिल रहेंगे।
होगी समीक्षा
भारत और नेपाल आपसी संबंधों की समीक्षा के साथ-साथ पहले से चल रही सहयोग की परियोजना में आ रहे गतिरोध पर चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा नेपाल के संविधान में मधेसियों समेत नेपाल के अन्य वर्गों की भागेदारी पर भी चर्चा के आसार हैं। भारत समेत समेत दुनिया तमाम देशों का मानना है कि नेपाल में मधेसियों को भी उनकी आबादी के हिसाब से नागरिकता को ध्यान में रखकर मान्यता मिलनी चाहिए।
समझौता और सहमति के आसार
भारत नेपाल के साथ एक दूसरे के हितों को ध्यान में रखकर हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों देश भारत-नेपाल की सीमा पर सुरक्षा से चिंताओं को गंभीरता से ले सकते हैं। परिवहन और आधारभूत संसाधन के क्षेत्र में समझौते अथवा सहमति पत्र पर दस्तखत हो सकते हैं। इसके अलावा भारत को नेपाल को हर संभावित सहयोग का भरोसा दे सकता है।