बिहार के नालंदा जिले के बेलची में ग्यारह दलितों का नर संहार हुआ था। खबर इंदिरा जी तक पहुंची और उन्होंने बेलची जाने का निर्णय ले लिया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उनके 100वें जन्मदिन पर अपने व्याख्यान में बेलची यात्रा को याद करते हुए बताते हुए हैं कि इंदिरा कितनी दृढ़ निश्चयी थी।
बेलची तक सड़क के रास्ते से पहुंचना बहुत कठिन था। कांग्रेस नेताओं ने भी समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी और जाने का निर्णय लिया। इंदिरा जी ने कहा कि हम बेलची जरूर जाएंगे, चाहे हमें पूरी रात पैदल ही क्यों न चलना पड़े।
मंगाना पड़ा हाथी
इंदिरा जी जीप से बेलची के लिए आगे बढ़ी। रास्ता कठिन था ही। अचानक कीचड़ में जीप फंस गई। जीप को निकालने के लिए ट्रैक्टर बुलाया गया। कोई समाधान न निकलते देख इंदिरा जी जीप से कूद गईं और साड़ी को टखने तक उठाकर पैदल चलने लगी। कीचड़ में आगे बढ़ना मुश्किल होता जा रहा था, लेकिन वह आगे बढ़ रही थी।
उन्होंने कहा कि वह इस तरह से पैदल चलकर बेलची पहुंचने के लिए भी तैयार हैं। अंत में हाथी लाया गया और इंदिरा जी हाथी पर बैठकर साढ़े तीन घंटे में बेलची के लोगों का दर्द जानने पहुंची। उनकी आवाज के साथ खड़ी हुई और न्याय देने की गुहार लगाया।
किसी ने नहीं की ऐसी यात्रा
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि दलितों के साथ अत्याचार विरुद्ध आवाज उठाने के लिए जहां तक मेरा ख्याल है किसी राष्ट्रीय नेता ने कभी ऐसी यात्रा नहीं की थी।