मुख्य विपक्षी दल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इंडिगो संकट के मामले में सरकार एयरलाइन के आगे झुक गई और उसे अपने ही दिशा निर्देश वापस लेने पड़े। कांग्रेस ने इसे देश में बढ़ते कॉरपोरेट एकाधिकार का परिणाम बताया है। पार्टी का कहना है कि एयरपोर्ट्स पर आज जो अव्यवस्था दिख रही है, वह इसी एकाधिकार की देन है। वे कहते हैं हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज में बैठने की बात की गई थी, लेकिन आज एयरपोर्ट पर हालत ऐसी है कि यात्रियों और इंडिगो स्टाफ के बीच जूते-चप्पल चल रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि देश के एयरलाइन सेक्टर का 92 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ दो कंपनियों इंडिगो और टाटा के पास है। ऐसे में सरकारी नीतियों पर इनका दबदबा बढ़ गया है। पार्टी का दावा है कि यात्री सुरक्षा से जुड़ी नई गाइडलाइंस भी इन कंपनियों के दबाव में वापस लेनी पड़ीं। जब एयरलाइन, सरकार और व्यापार कुछ ही कंपनियों के हाथों में सीमित हो जाएगा, तब परिणाम वही होगा जो आज एयरपोर्ट्स पर देखने को मिल रहा है अव्यवस्था, मनमानी और यात्रियों की बढ़ती कठिनाइयां।
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कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के अनुरोध ललित जैन ने अमर उजाला से चर्चा में कहा, मोदी सरकार केवल दो काम के लिए जानी चाहती है कि पहला बगैर सोचे समझे निर्णय लेना। दूसरा अपने उद्योगपति मित्रों की मदद करना। इन्हीं नीतियों के कारण इंडिगो का यह हाल हुआ है। आज दो हजार फ्लाइट ठप हो गई। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। सैकड़ों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे हुए है। जिन्हें ना एयरलाइन कंपनियां कोई मदद कर रही है। ना ही सरकार की तरफ से कोई सुविधा दी जा रही है। सरकार ने जानबूझकर एविएशन सेक्टर पर ऐसी नीति लगाई कि छोटी एयरलाइन कंपनियां बंद हो गई। नतीजा यह हुआ कि देश के यात्रियों का दबाव इंडिगो और एयर इंडिया पर आ गया। इसमें भी सबसे ज्यादा शेयर इंडिगो के पास है।
यह संकट इंडिगो की लापरवाही और मोदी सरकार की नीतियों का नतीजा है। यह मंत्रालय सरकार के सबसे बड़े सहयोगी दल टीडीपी के पास है। इससे साफ समझ आ रहा है कि प्रधानमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप करने और इंडिगो पर कार्रवाई करने से क्यों बच रहे है।
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अमर उजाला से चर्चा में कांग्रेस प्रवक्ता प्रखर सिंह ने कहा, इंडिगो का घटनाक्रम बता रहा हैं कि यह आम जनता की नहीं बल्कि उद्योगपतियों की सरकार है। इस सरकार में उद्योगपति जो चाहे वह कर सकते है। एक एयरलाइन कंपनी अपना पूरे एकाधिकार दिखा रही हैं मनमाने तरीके से फ्लाइट रद्द कर रही है। सरकार क्यों इस कंपनी पर ठोस कार्रवाई करने से बच रही है? इसलिए हमारी पार्टी कांग्रेस और हमारे नेता राहुल गांधी बार बार बोलते है कि हम बिजनेस के विरोध में नहीं बल्कि किसी कंपनी के मोनोपॉली के खिलाफ है। मोनोपॉली इस देश के लिए बड़ा खतरा है। लेकिन सरकार ये उद्योगपतियों की सरकार है। चंद उद्योगपतियों का ही साथ देती है। लोगों की परेशानी बढ़ रही है,लेकिन एयरलाइन कंपनियां अपने टिकट के दाम बढ़ा रही है। सरकार कुछ नहीं कर रही है।
इससे पहले शुक्रवार को राज्यसभा में कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इंडिगो फ्लाइट कैंसिल होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने एयरलाइन के एकाधिकार और इसका सांसदों और आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शून्यकाल के दौरान व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उड़ानों के रद्द होने से कई सांसदों की वीकेंड यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई सांसदों ने शुक्रवार को घर लौटने और सोमवार को वापस आने के लिए उड़ान में अपना टिकट बुक किया था, लेकिन उड़ान रद्द होने के बाद अब उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समस्या एक एयरलाइन के एकाधिकार के कारण उत्पन्न हुई है।
एविएशन जानकारों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। यात्रियों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए रेलवे ने भी कदम बढ़ाए हैं। शुक्रवार को रेलवे ने अतिरिक्त भीड़ को संभालने के लिए कुछ स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की, ताकि फंसे हुए यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा सुविधा मिल सके।
इंडिगो एयरलाइन की लापरवाही की होगी जांच
इंडिगो के ऑपरेशन में लगातार 5वें दिन शनिवार को सुधार नहीं दिख रहा है। देश के 4 बड़े एयरपोर्ट समेत कई शहरों से आज भी इंडिगो की 400 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल की जा चुकी हैं। इसके पहले दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई एयरपोर्ट पर रातभर पैसेंजर परेशान दिखे। पिछले चार दिन में रद्द उड़ानों की संख्या 2,000 से ज्यादा हो गई है। वहीं, रोजाना एवरेज 500 फ्लाइट लेट हो रही हैं। इंडिगो संकट के बीच सरकार ने हवाई किराए पर लिमिट लगा दी है। सरकार ने एक निर्देश में कहा कि एयरलाइन किराए की लिमिट का सख्ती से पालन करें। साथ ही कहा कि हालात नॉर्मल होने तक यह लिमिट बनी रहेगी। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि नए एफडीटीएल के नियम 1 नवंबर से लागू हैं, लेकिन किसी अन्य एयरलाइन को दिक्कत नहीं आई, जिससे साफ है कि गलती इंडिगो की है। एयरलाइन की लापरवाही की जांच होगी और एक्शन तय है।
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