भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस. सोमनाथ का हाल ही का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो एक विमान का है, जिसमें इसरो चीफ सफर कर रहे थे। इस दौरान विमान में मौजूद यात्रियों ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
क्या है मामला?
हाल ही में इसरो चीफ सोमनाथ इंडिगो की फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे। इंडिगो फ्लाइट की अटेंडेंट ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमें इसरो चीफ के इस फ्लाइट में होने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। हमें आपके इस फ्लाइट में होने पर गर्व है। शुक्रिया हमें गर्व महसूस कराने के लिए। इसके बाद विमान में बैठे यात्रियों ने भी तालियों से एस. सोमनाथ का अभिवादन किया।
चंद्रयान-3 ने रचा इतिहास
हालांकि, इसरो प्रमुख जिस विमान से यात्रा कर रहे थे, उसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी है। इंडिगो ने भी कोई विवरण साझा नहीं किया है। बता दें कि चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त को शाम 6.04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सॉफ्ट लैंडिंग की थी। चार साल में दूसरे प्रयास में चंद्रमा पर इस टचडाउन के साथ भारत अमेरिका, चीन और तत्कालीन सोवियत संघ के बाद चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया है।
चंद्रयान-3 मिशन को लेकर सोमनाथ ने दी खुशखबरी
चंद्रयान-3 मिशन पर इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा कि सब कुछ ठीक काम कर रहा है। सारा डेटा बहुत अच्छे से आ रहा है। हमें उम्मीद है कि 14 दिन के अंत तक हमारा मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा। सोमनाथ ने आदित्य-L1 मिशन पर कहा कि हम बस लॉन्च के लिए तैयार हो रहे हैं। रॉकेट और सैटेलाइट तैयार हैं। हमने लॉन्च के लिए रिहर्सल पूरी कर ली है।
SAC के निदेशक ने कही यह बात
अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC) के निदेशक नीलेश एम. देसाई ने चंद्रयान-3 मिशन पर कहा कि सल्फर बहुत प्रमुख रूप में दिखाई दिया है। इससे पहले भी चंद्रमा की सतह पर सल्फर पाया गया था, लेकिन इतनी प्रमुखता से नहीं। यह अवलोकन का अनोखा बिंदु है जो हमें हाल ही में मिला है। आगे का विश्लेषण अभी भी चल रहा है, लेकिन यह एक अच्छा संकेत है कि सल्फर उपलब्ध है। इसके अलावा, ऑक्सीजन के निशान भी हैं, लेकिन वे हाइड्रोजन की उपलब्धता की भी तलाश कर रहे हैं, क्योंकि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों को एक साथ रखने के बाद हम भविष्य में पानी पैदा करने के बारे में सोच सकते हैं।
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक बोले- चुनौतियों का भी सामना करना होगा
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ वाई.एस. राजन ने कहा कि आदित्य की 2008 में ही पृथ्वी के निकट की कक्षा में जाने की योजना बना ली गई थी। इसरो के पास 15 साल से भी अधिक समय से अंतरिक्ष अन्वेषण की योजना है। इसरो को अंतरग्रहीय मिशनों की आगे की चुनौतियों का भी सामना करना होगा।