विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक कोरोना के खिलाफ आपातकालीन उपयोग सूची में फाइजर, एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडर्ना और सिनोफार्म के कोविड-19 टीकों को शामिल किया है, लेकिन भारत में निर्मित कोवाक्सिन को अभी भी विश्व स्वास्थ्य संगठन की मंजूरी का इंतजार है। मंगलवार को डब्ल्यूएचओ की बैठक में कोवॉक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बॉयोटेक को उम्मीद थी कि उसे भी वैश्विक संस्था कोरोना के खिलाफ आपातकालीन उपयोग सूची वाले कोविड-19 टीकों में शामिल कर लेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
'वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल करने के लिए यह जरूरी है कि उसे बनाने वाली कंपनी कितनी समय सीमा के अंदर जरूरी और पर्याप्त डेटा उपलब्ध करा देती है। समय सीमा इस बात पर निर्भर करती है कि कंपनी वैक्सीन की गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रभाविकता और विकासशील व अविकसित देशों में वैक्सीन के उपयोग के लिए मूल्यांकन का पर्याप्त डेटा प्रदान करने मे सक्षम है या नहीं।
19 अप्रैल को भारत बॉयोटेक ने किया था आवेदन
कोवॉक्सिन को आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल करने के लिए भारत बॉयोटेक की ओर से 19 अप्रैल को आवेदन किया गया था। कंपनी की ओर से डब्ल्यूएचओ की तकनीकि समिति के सामने कई तरह के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए हैं। हालांकि, अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोवॉक्सिन के अंतिम लाभ-जोखिक के मूल्यांकन पर कंपनी का स्पष्टीकरण मांगा है।
इस बीच कोवाक्सिन को ओमान में भी अप्रूव लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। ओमान में भारतीय दूतावास की ओर से बताया गया कि कोवाक्सिन की दोनों डोज ले चुके यात्रियों के ओमान पहुंचने पर उन्हें क्वारंटीन नहीं रहना होगा। ओमान सरकार ने बुधवार को यह फैसला लिया।
77.8 प्रतिशत है प्रभावी
भारत का पहला स्वदेशी कोविड-19 टीका, कोवॉक्सिन 77.8 प्रतिशत प्रभावी है। कंपनी की ओर से किए गए तीसरे चरण के ट्रायल के बाद ये आंकड़े प्रस्तुत किए गए थे। भारत बायोटेक ने डब्ल्यूएचओ को बताया कि 14 देशों में कोवॉक्सिन को मंजूरी दी गई है और 70 मिलियन खुराक निर्यात की गई हैं।