अमेरिका की ओर से उच्च कुशल कर्मचारियों को दिए जाने वाले एच-1बी वीजा के लिए सामान्य श्रेणी के आवेदनों की संख्या 65 हजार और खास श्रेणी के आवेदनों की संख्या 20 हजार के पार पहुंच चुकी है। इनमें से सबसे ज्यादा आवेदन भारतीय कंपनियों या भारत में अपना कारोबार करने वाली कंपनियों की ओर से किए गए हैं।
अमेरिका ने इस साल सामान्य श्रेणी के लिए 65 हजार और वहां से विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग व गणित में उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले लोगों के लिए 20 हजार एच-1बी वीजा जारी करने की योजना बनाई है। अमेरिकी सरकार का अनुमान है कि इस साल एच-1बी वीजा के लिए 2.5 लाख से ज्यादा आवेदन आ सकते हैं।
अमेरिकी सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) ने बताया कि एच-1बी वीजा के लिए सबसे ज्यादा आवेदन टीसीएस, विप्रो व इनफोसिस जैसी भारतीय कंपनियों या भारत में अपना कारोबार करने वाली आईबीएम जैसी कंपनियों की ओर से आए हैं। हालांकि यूएससीआईएस ने यह नहीं बताया गया है कि एक अप्रैल से अब तक एच-1बी के लिए कितने आवेदन प्राप्त हुए हैं।
अमेरिका में एक अक्टूबर से शुरू होने वाले वित्त वर्ष 2017 के लिए एच-1बी वीजा को आवेदन एक अप्रैल से स्वीकार किए जा रहे हैं। यूएससीआईएस के मुताबिक एच-1बी वीजा के लिए आए आवेदनों का चुनाव कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ के जरिए किया जाएगा। अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष बिल स्टोक ने बताया कि पिछले साल एच-1बी वीजा के लिए 2.3 लाख आवेदन आए थे।
इस बार आवेदनों की संख्या करीब ढाई लाख हो सकती है। स्टोक का कहना है कि एच-1बी वीजा की खास तरह की श्रेणी बढ़ाने पर से भारतीय कंपनियों पर थोड़ा बहुत असर पड़ा है। हालांकि भारतीय कंपनियां अपने कारोबार के लिए ज्यादातर एच-1बी वीजा पर ही निर्भर हैं।