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पाकिस्तानी जेलों में सजा से पहले भारतीयों को मिलती रही है मौत

Thu, 18 May 2017 03:44 PM IST
amarujala.com, Presented By: विजय जैन
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सर्बजीत सिंह, कुलभूषण जाधव, किरपाल सिंह
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भारत के पूर्व नेवी अफसर कुलभूषण जाघव को पाकिस्तान कोर्ट ने मौत की सजा सुना दी है, लेकिन एक सच ये भी है कि पाकिस्तान की जेलों में कैदियों को सजा से पहले ही मौत मिलती रही है।
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मई, 2013 में लाहौर की कोट लखपत जेल में सरबजीत सिंह की बर्बरता से पिटाई के कारण मौत हुई थी। सरबजीत को 1990 में लाहौर में हुए बम धमाकों का दोषी मान कर पाकिस्तान की अदालत ने मौत की सजा दी थी।

अप्रैल, 2016 में कोट लखपत जेल में ही जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किरपाल सिंह की मौत हो गई। मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताया गया। किरपाल को भी फैसलाबाद रेलवे स्टेशन पर हुए बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार कर मौत की सजा सुनाई गई थी।
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पाकिस्तान के कराची की एक जेल में किशोर भगवान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत पाकिस्तानी जेलों में भारतीय कैदियों के साथ हो रहे अत्याचार का एक और सुबूत है।

 आरोप लगा कि पाकिस्तानी जेल अफसरों ने उसे करंट देकर मारा। 
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महीनों तक शव भी नहीं लौटाता पाक!

कुलभूषण जाधव, पाकिस्तान
हद तो ये है कि पिछले डेढ़ साल में मारे गए या मरे आधा दर्जन भारतीयों के शव लौटाने में भी पाक सरकार महीना बिता देती है ताकि भारत में दोबारा पोस्टमार्टम कराने के बाद भी ज्यादती के सुबूत न मिल सकें।

2013 में चार जुलाई को साठ साल के मछुआरे दोडा भाई की कराची जेल में मौत हो गई। लंबी हीलाहवाली के बाद पाक सरकार ने 21 दिन बाद शव भारत को सौंपा।

इसके करीब छह महीने बाद बीती 19 दिसंबर को गुजरात के भीखा लाखा सियाल की उसी जेल में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। उनकी 12 साल की बेटी ने प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा, लेकिन पाक ने शव नहीं सौंपा।

 इसी बीच, वसंत पंचमी की सुबह एक और गुजराती युवक का शव कराची की लांधी जेल में मिला। 

डेढ़ साल के अंदर कराची में दोडा भाई, भीखा सियाल और किशोर भगवान व लाहौर में चमेल सिंह, सरबजीत और जाकिर अली की मौत साबित करती है कि पाक जेलों में भारतीय सुरक्षित नहीं हैं।
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