फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आरटीपीसीआर जांच नियम: कनाडा जाने वाले भारतीयों को हो रही भारी मुश्किल

Sat, 21 Aug 2021 03:29 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

  • कनाडा ने कोरोना की दूसरी लहर के चलते भारत से आने वाली सीधी उड़ानों पर पाबंदी लगा रखी है
  • छात्रों को तीसरे देश से आरटीपीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट लेकर जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
कोरोना वासरस: टेस्ट सैंपल लेता कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

19 वर्षीय लेरिना कुमार के लिए भारत से कनाडा जाना पहाड़ लांघने जैसा रहा। पहले उसने भारत से दुबई जाने वाली उड़ान पकड़ी। वहां से बार्सिलोना जाने वाले विमान में सवार होने के लिए नौ घंटे तक इंतजार किया।

विज्ञापन


बार्सिलोना से मेक्सिको पहुंची और आरटीपीसीआर जांच के लिए उसे वहां दो दिन ठहरना पड़ा। इसके बाद जाकर वह कनाडा के वेंकुवर पहुंची। वह यहां पर एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं।

चार देशों की यात्रा उसके पर्यटन कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था। यह उसके लिए मजबूरी थी क्योंकि कनाडा ने कोरोना की दूसरी लहर के चलते भारत से आने वाली सीधी उड़ानों पर पाबंदी लगा रखी है।
विज्ञापन


साथ ही वह भारत में हुई आरटीपीसीआर जांच को स्वीकार नहीं कर रहा है। ऐसे में कनाडा जाने वाले भारतीयों खासकर वहां के विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों को तीसरे देश से आरटीपीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट लेकर जाना पड़ रहा है।

इतना ही नहीं, यह तीसरा देश कनाडा की स्वीकृत सूची में भी शामिल होना जरूरी है। छात्र और अभिभावक लगातार मांग कर रहे हैं कि भारत को अपनी आरटीपीसीआर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किए जाने का मसला कनाडा के साथ उठाना चाहिए। इन लोगों का कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया न केवल बहुत असुविधाजनक है बल्कि काफी महंगी भी पड़ रही है।  

लेरिना कुमार को अपने इस सफर पर 5 लाख रुपये से अधिक खर्च करने पड़े जबकि सामान्य हालात में यह खर्चा 1.50 लाख से भी कम होता।

उनकी मांग लवली कुमार ने कहा कि उनकी योजना बेटी के साथ वहां जाकर उसके रहने की व्यवस्था करने की थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते यह संभव नहीं हो सका। उनकी बेटी को न केवल अकेले पहली बार, वह भी चार देशों की यात्रा करनी पड़ी।

लेरिना कनाडा में एमिली कैर यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट एंड डिजाइन में दूसरे वर्ष की स्नातक की छात्रा हैं। उन्होंने पिछले साल दाखिला लिया था लेकिन अभी वह महामारी के कारण केवल ऑनलाइन कक्षाएं ले रही थीं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें