छोटे से देश नेपाल पर कई देश नजर रखते हैं। नेपाल भारत का खास पड़ोसी देश है, लेकिन चीन, अमेरिका समेत तमाम देश निगाह गड़ाए रखते हैं। फिलहाल वहां सेनाध्यक्ष जनरल अशोक राज सिग्देल मुख्य भूमिका में हैं। शांति बहाली की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां लगातार हालात को लेकर सतर्क हैं।
रिसर्च एंड एनालिससि विंग (रॉ) के पूर्व अफसर कहते हैं कि नेपाल ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता। हमारी सीमाएं जुड़ी हैं। आवाजाही और रोटी-बेटी का रिश्ता है। भारत और नेपाल की जड़े गहरी हैं और हमारा एक अलग वेवलेंथ का रिश्ता है। सूत्र का कहना है कि नेपाल पर आज से नहीं, कई दशक से कई देशों की नजर रही है। चीन और अमेरिका भी नेपाल में अपने हिसाब से बदलाव चाहते हैं। कई अमेरिकी एजेंसियां वहां सक्रिय रही हैं। आम जनता में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ाने, अवधारणा बदलने में ये बड़ी भूमिका निभाती हैं। कई देशों में इस तरह के षडयंत्र से वहां की सरकार बदल जाती है।
अचानक इस तरह भड़क जाएगा आंदोलन?
सुमित मिश्रा को भी संदेह है। दक्षिण मामलों पर काम कर रहे सुमित कहते हैं कि मुझे तो आशंका है। वहां की सरकार की नाकामी को एक तरफ रख दीजिए। सुमित कहते हैं कि जनता जब अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरती है तो इस भीड़ का भी एक नेता और उसका मानस होता है। यहां तो बहुत कुछ अचानक हो गया। आगजनी, तोड़फोड़, मारपीट सब। अभी तक यह भी साफ नहीं है कि इस भीड़ का नेता कौन है। असल किरदार किसने निभाया? सुमित कहते हैं कि जिस तरीके से नेपाल के सरकारी भवनों, बैंकों, संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है, इसकी भरपाई में 10 साल से अधिक लग सकते हैं। हजारों करोड़ की संपत्ति जलकर राख हो गई है। लोकतंत्र का इतना वीभत्स रुप बमुश्किल देखने में आता है। सुरक्षा ऐजेंसी से जुड़े सूत्र का कहना है कि अमेरिका जैसे देश में तमाम ऐसी एजेंसियां हैं जो जनता में सरकार के प्रति आक्रोश को हवा देती रहती हैं। नेपाल में भी ऐसा हो सकता है। नेपाल में राजदूत रह चुके एक आईएफएस अफसर का कहना है कि बाहरी ताकतें अपना काम तो करती हैं। इससे इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यह भी सही है कि केपी शर्मा ओली की सरकार भी इस स्थिति के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है।
उच्च स्तर की सतर्कता बरत रहा है भारत
नेपाल में जनता का गुस्सा फूटा है। कोई भी देश जनता के गुस्से के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकता। भारत ने भी वहां के हालात को देखकर बहुत संभलकर प्रतिक्रिया दी है। हिंसक आंदोलन के जल्द समाप्त होने, शांति और संवाद से समस्या के समाधान पर जोर दिया है। लेकिन इसके बाद भी भारत नेपाल की हर घटना पर सतर्क निगाह रख रहा है। नेपाल से लगती सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है। नई दिल्ली नेपाल स्थित अपने अधिकारियों के संपर्क में है। नेपाल में रह रहे भारत के लोगों को भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के हालात को लेकर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में चर्चा की थी। कुछ खास उपाय पर जोर दिया जा रहा है। विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय भी वहां बदल रहे हर हालात पर नजर गड़ाए है।