केंद्र सरकार ने हृदय संबंधी बीमारियों के नए कारकों की पहचान को लेकर स्वदेशी अध्ययन कराने का फैसला लिया है। इसमें कोरोना महामारी के बाद शुरू हुई पोस्ट कोविड स्थिति को भी शामिल किया है। इसके तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने देश के सभी शोध संस्थान को पत्र लिखकर प्रस्ताव मांगा है।
बीते कुछ समय से अक्सर कम उम्र में या स्वस्थ लोगों में सामान्य स्थितियों में ही दिल के दौरे की खबरें सामने आ ही हैं। अब केंद्र सरकार ने हृदय संबंधी बीमारियों के नए कारकों की पहचान को लेकर स्वदेशी अध्ययन कराने का फैसला लिया है। इसमें कोरोना महामारी के बाद शुरू हुई पोस्ट कोविड स्थिति को भी शामिल किया है। इसके तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने देश के सभी शोध संस्थान को पत्र लिखकर प्रस्ताव मांगा है। विभाग ने लिखा है कि इन बीमारियों को रोकने के लिए प्रारंभिक जोखिम-मूल्यांकन नीतियां विकसित करने के लिए अलग-अलग संस्थानों के शोधकर्ताओं को मिलाकर एक टीम का गठन होगा, जो वैज्ञानिक अध्ययन के साथ साक्ष्य एकजुट करेगी।
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बीमारी का बोझ कम करने में मिलेगी मदद
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बहुस्तरीय टीम में सरकारी, निजी या फिर एनजीओ संचालित शोध संस्थान शामिल हो सकते हैं। इन साक्ष्यों को जुटाने के बाद बीमारी का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। इसमें वैज्ञानिकों के अलावा चिकित्सकों को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि चिकित्सा अनुभवों को भी शामिल किया जा सके।
तीन श्रेणियों में होगा अध्ययन
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस पूरे प्रस्ताव को तीन श्रेणी में रखा गया है। पहली श्रेणी में पोस्ट कोविड पर फोकस करते हुए अध्ययन किया जाएगा, जिसमें कार्डियक मायोसाइटिस के साथ वायरल इंटरैक्शन के आणविक तंत्र पर जोर दिया जाएगा। दूसरी श्रेणी में हृदय क्रिया और दवा खोज को समझने के लिए मॉडल विकसित होगा, जिसमें जीन, प्रोटीन या फिर मेटाबोलाइट्स में रोग जीव विज्ञान का उपयोग किया जाएगा। अंतिम श्रेणी कार्डियो मेटाबोलिक स्वास्थ्य आपूर्ति आवश्यकता और रोकथाम रणनीतियों से जुड़ी है, जिसमें सीवीडी और हृदय विफलता पर जोर दिया जाएगा। विभाग के अनुसार, अगले दो महीने में टीम का गठन करने के बाद अलग-अलग केंद्रों पर एक साथ अध्ययन शुरू होंगे।