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भारतीय वैज्ञानिकों ने ढूंढे वायरस के 11 रूप, वुहान के ए2ए वायरस ने फैलाई महामारी

Wed, 29 Apr 2020 12:19 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस की जांच (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
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भारत में कोरोना वायरस पर हुए नए शोध के अनुसार दुनियाभर में फैले वायरस के 11 प्रकार हैं लेकिन कोरोना का एक ही रूप महामारी का कारण है। जिसने इंसानों के फेफड़ों को संक्रमित किया है। वायरस के कारण दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह शोध पश्चिम बंगाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स के वैज्ञानिकों ने किया है।

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शोधकर्ताओं ने विभिन्न तरह के 3600 वायरस पर शोध करने के बाद इस बात का पता लगाया है कि वुहान से दुनियाभर में एक ही तरह के वायरस से संक्रमण फैला है। इसके धीरे-धीरे 10 और रूप विकसित होते गए। कोरोना वायरस के मूल रूप का नाम ए2ए रखा गया है। 

3600 वायरस पर हुई शोध
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित शोध के मुताबिक ए2ए कोरोना के बाकी 10 प्रकारों पर हावी हो गया और महामारी फैलाने के लिए यही स्ट्रेन जिम्मेदार हैं। शोधकर्ताओं ने 3600 वायरस पर शोध करने के बाद नतीजे जारी किए हैं। यह शोध दिसंबर 2019 से छह अप्रैल 2020 तक किया गया।
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इसलिए खतरनाक है ए2ए वायरस
शोधकर्ताओं के अनुसार कोरोना वायरस जितनी तेजी से शरीर में पहुंचता है उतनी ही तेजी से शरीर के अंदर यह संख्या बढ़ाता है। जिससे मरीज की हालत नाजुक हो जाती है। ए2ए टाइम में यही सबसे बड़ा खतरा है। इस स्ट्रेन में अमीनो एसिड, एस्पार्टिक एसिड से ग्लाइसीन में बदल जाता है। कोरोना के दूसरे प्रकारों में केवल एस्पार्टिक एसिड मौजूद होता है और उसमें कोई बदलाव नहीं होता। इसी कारण ए2ए सबसे घातक है।

भारत में 45 प्रतिशत के अंदर ए2ए वायरस
शोध के अनुसार कुछ देशों में ए2ए वायरस की पहुंच 80 प्रतिशत तक हो सकती है। जबकि भारत में यह 45 प्रतिशत मौजूद है। शोधकर्ता पार्थ मजूमदार का कहना है कि दुनियाभर में कोविड-19 से बचाव के लिए टीके तैयार किए जा रहे हैं लेकिन सबसे बड़ी लड़ाई ए2ए के खिलाफ लड़नी होगी।

कोरोना का रूप जितना ताकतवर होगा उतनी तेजी से फैलेगा संक्रमण
शोधकर्ताओं ने कोरोना के आरएनए की जांच की। रिपोर्ट से पता चला है कि इंसान के फेफड़े अपनी सतह से एसीई2 प्रोटीन जारी करते हैं। कोरोना से निकलने वाले स्पाइक प्रोटीन पहले एसीई2 से चिपकते हैं फिर दूसरा प्रोटीन फेफड़े की कोशिकाओं में घुसने की कोशिश करता है। कोरोना का रूप जितना ताकतवर होगा यह इंसानों के प्रोटीन पर उतनी ही तेजी से जुड़कर फेफड़ों में पहुंचेगा।

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