भारतीय वैज्ञानिक वैसे तो पूरी दुनिया में अपना डंका बजा चुके हैं, लेकिन देश में एक परिवार की तीसरी पीढ़ी ऐसी भी है जिसके पास खगोल शास्त्र की औपचारिक शिक्षा नहीं होने के बावजूद यह परिवार वर्ष 1900 से सूर्य की हर चाल पर नजर रखे हुए है।
परिवार के यह प्रयास पूरी दुनिया के लिए एक अजूबा हैं, लेकिन कोडाइकनाल स्थित सौर वैधशाला में काम करना पी. देवेंद्रन के लिए महज एक पारिवारिक परंपरा है। उनके दादा और पिता के बाद अब चौथी पीढ़ी भी इस जिम्मेदारी के लिए तैयार है। फर्क सिर्फ इतना है कि चौथी पीढ़ी के पास भौतिकी में पीजी की डिग्री है।
सुबह की धुंधली रोशनी में प्रतिदिन सौर वैधशाला जाना पी. देवेंद्रन के लिए कोई नया काम नहीं है। वैधशाला में शटर उठाने के लिए वह रस्सी खींचते हुए छह इंच के टेलीस्कोप को सेट करते हुए बताते हैं कि इसे 1899 से सूरज की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उपयोग में लाया जा रहा हैं।
यहां आज भी सूरज की हर चाल को नोट किया जाता है। देवेंद्रन ने खगोलशास्त्र की औपचारिक शिक्षा नहीं ली है, लेकिन अपने दादा और पिता के साथ यहां आकर वह 1986 से सूर्य का अध्ययन कर रहे हैं। वह सूर्य की हर चाल को नोट करते हैं।