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भारत की सड़कें हुईं और जानलेवा, हर 3.6 मिनट में मरता है एक इंसान

Thu, 21 Apr 2016 02:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत की सड़कें हुईं और जानलेवा - फोटो : getty
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पहले से ही जानलेवा मानी जाने वाली भारत की सड़कें अब 2015 में और अधिक जानलेवा हो गई हैं। 2014 के मुकाबले भारत की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
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इस इजाफे के बाद यह संख्या 1.46 लाख पहुंच गई है। इसका मतलब है कि भारत की सड़कों पर दुर्घटनाओं में हर रोज 400 मौतें होती हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि हर 3.6 मिनट में एक व्यक्ति की मौत होती है। 2014 में करीब 4.89 लाख मौतें हुई थीं, जो 2015 में 5 लाख के आंकड़े को भी पार कर गई हैं।

यह आंकड़े परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को जगाने के लिए काफी हैं, जिन्होंने 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों को 50 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल इसमें कमी आने के बजाए बढोत्तरी ही होती जा रही है।
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छोटे राज्यों में हुईं कम मौतें

केन्द्रशासित प्रदेशों में भी हुईं कम मौतें
राज्यों की तरफ से मिले आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 17,666 मौतें हुईं। इसके बाद नंबर आता है तमिलनाडु का, जहां पर 15,642 लोग मारे गए। वहीं महाराष्ट्र में 13,212 कर्नाटक में 10,856 और राजस्थान में 10,510 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई हैं।

जहां एक ओर देश के बड़े राज्यों में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं दूसरी ओर छोटे राज्यों और दिल्ली-चंडीगढ़ समेत सभी केन्द्रशासित प्रदेशों में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में कमी आई है। असम में मरने वालों की संख्या में 115 की कमी आई और दिल्ली में 49 मौतें कम हुईं।
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