पटरी से उतरने के कारण 70% रेल हादसे!
दरअसल, भारतीय रेलवे से हर दिन एक लाख किमी से अधिक फैले देशव्यापी ट्रेक नेटवर्क पर करीब ढाई करोड़ यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाती है। साल 2019-20 के लिए एक सरकारी रेलवे सुरक्षा रिपोर्ट में पाया गया है कि 70 फीसदी रेलवे दुर्घटनाओं के लिए उनका पटरी से उतरना जिम्मेदार था, जो पिछले वर्ष 68 फीसदी से अधिक था। इसके बाद ट्रेन में आग लगने और टक्कर लगने के मामले आते हैं, जो कुल दुर्घटनाओं में क्रमश: 14 और आठ फीसदी के लिए जिम्मेदार हैं। इस रिपोर्ट में साल 2019-20 के दौरान 33 यात्री ट्रेनों और सात मालगाड़ियों से संबंधित 40 पटरी से उतरने की घटनाएं गिनाई गईं। इनमें से 17 पटरी से उतरने की घटनाएं ट्रैक खराबियों के कारण हुईं। जबकि नौ घटनाएं ट्रेनों, इंजन, कोच, वैगन में खराबी के कारण हुईं है।
इन वजहों से पटरी से उतरती हैं ट्रेनें
- ट्रेन के पटरी से उतरने की एक वजह नहीं, बल्कि कई वजहें हैं। सबसे मुख्य कारण रेलवे ट्रैक पर मैकेनिकल फॉल्ट यानी रेलवे ट्रैक पर लगने वाले उपकरण का खराब हो जाने को माना जाता है।
- इसके अलावा ये हादसे उस वक्त होते हैं, जब पटरियों पर दरार पड़ जाती हैं। वहीं, ट्रेन के डिब्बों को बांध कर रखने वाले उपकरण का ढीला होना भी इसका एक कारण हो सकता है।
- इसके अलावा एक्सेल जिस पर ट्रेन की बोगी रखी होती है, उसका टूटना भी ट्रेन के डिरेल होने की एक संभावित वजह हो सकता है।
- लगातार चलते रहने के कारण ट्रेन की पटरियों से पहियों का घिस जाना भी ट्रेन के पटरी से उतरने की वजह हो सकता है।
- गर्मी के मौसम में पटरियों के स्ट्रक्चर में कई बार बदलाव आ जाता है। इसके अलावा तेज चलती ट्रेन को तेज स्पीड से मोड़ना या फिर ब्रेक लगा देना भी ट्रेन के पटरी छोड़ने की वजह हो सकता है।
- इसे रोकने का एक ही तरीका है मरम्मत कार्य चलता रहे। थोड़ी भी गड़बड़ी नजर आने पर उसे तुरंत ठीक किया जाए।