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रेलवे: ट्रैक पर गड़बड़ी की तो तुरंत होगी पहचान, पथराव और चोरी रोकने के लिए उठाया ये कदम

Fri, 16 Oct 2026 05:48 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पत्थरबाजी और चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने बड़ा बदलाव किया है। रेलवे ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ड्रोन से निगरानी बढ़ा रहा है।
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रेलवे ट्रैक (सांकेतिक फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भारतीय रेलवे ट्रैक पर पथराव, चोरी और अवैध आवाजाही जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ड्रोन से निगरानी बढ़ा रहा है। कैमरों से लैस ड्रोन के जरिये संवेदनशील स्थानों पर नजर रखी जा रही है। इससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिल रही है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, मार्च 2027 तक ड्रोन की संख्या 11 से बढ़ाकर 22 करने की योजना है।

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ईस्ट कोस्ट रेलवे ने अपने तीन मंडलों में 11 ड्रोन तैनात किए हैं। ये 284 स्टेशनों, 2,708 रूट किलोमीटर और 6,072 ट्रैक किलोमीटर के दायरे में निगरानी कर रहे हैं। इनमें खुर्दा रोड मंडल में चार, संबलपुर में छह और रायगढ़ा में एक ड्रोन तैनात है। रेलवे की योजना मार्च 2027 तक इनकी संख्या 22 करने की है। ईस्ट कोस्ट रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एक जनवरी से 15 सितंबर 2026 के बीच ड्रोन से 3,033 उड़ानें भरीं। इनमें संबलपुर मंडल में सबसे ज्यादा 1,329 उड़ानें हुईं। रायगढ़ा में 1,024 और खुर्दा रोड मंडल में 680 उड़ानें भरी गईं। इनमें से 1,265 उड़ानें संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा के लिए थीं। इनके जरिये पथराव, तोड़फोड़ और केबल चोरी रोकने के साथ आग लगने के खतरे पर भी नजर रखी गई।

रात में भी निगरानी, भीड़ संभालने में मदद
ड्रोन में नाइट विजन और थर्मल कैमरे लगे हैं। इनकी मदद से रात में भी निगरानी की जा सकती है। जंगलों, पहाड़ी इलाकों, सुरंगों, पुलों और सुनसान रेलखंडों पर इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। रेलवे स्टेशनों, कोचिंग यार्ड और महत्वपूर्ण परिसरों की निगरानी भी इनके जरिये होती है। ईस्ट कोस्ट रेलवे के मुताबिक, पुरी में 2026 की रथ यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन में ड्रोन से मदद मिली। 'मेरी सहेली' पहल के तहत महिला यात्रियों की सुरक्षा में भी इनका इस्तेमाल हो रहा है। लाइव वीडियो और ऑडियो चेतावनी से लोगों को रेलवे ट्रैक पार करने और पथराव करने से रोकने में मदद मिलती है। रेलवे के अनुसार, एक ड्रोन टीम करीब 8 से 10 किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी कर सकती है। इससे कम समय में बड़े इलाके पर नजर रखना आसान होता है।
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इसलिए ली जा रही ड्रोन की मदद
ट्रेनों पर हमले के बाद आरपीएफ ड्रोन कैमरों की मदद से उन इलाकों पर खास नजर रखेगी, जहां पहले पत्थरबाजी या अन्य असामाजिक घटनाएं हो चुकी हैं। ड्रोन के जरिए रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद सुनसान जगहों, पुलों, झाड़ियों और संवेदनशील क्षेत्रों की आसानी से निगरानी की जा सकेगी। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि का समय रहते पता लगाकर तुरंत कार्रवाई करना संभव होगा।

आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन तकनीक से रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर भी नजर रखी जा सकेगी, जहां सुरक्षा कर्मियों की पहुंच आसान नहीं होती। वहीं किसी घटना की सूचना मिलने पर ड्रोन को तुरंत मौके पर भेजकर स्थिति का आकलन किया जा सकेगा, जिससे त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बनेगी। ड्रोन निगरानी से पत्थरबाजी की घटनाओं पर रोक लगाने के साथ-साथ रेलवे ट्रैक पर अतिक्रमण, अवैध गतिविधियों और अन्य सुरक्षा चुनौतियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। रेलवे की इस पहल को यात्रियों की सुरक्षा के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
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