दरअसल, रेलवे के 18 जोन में से चार जोन कोहरे से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इनमें दिल्ली, लखनऊ और मुरादाबाद को कवर करने वाला उत्तर जोन इसमें शामिल है। कोहरे की वजह से रोज चलने वाली कई सुपरफास्ट ट्रेनों को कैंसिल भी किया जा रहा है, जबकि कुछ ट्रेनों की सुरक्षा की दृष्टि से स्पीड कम कर दी गई है। रेलवे बोर्ड से जुड़े सूत्रों का कहना है कि,कोहरे के दौरान पहली दिसंबर से कई स्पेशल ट्रेन नहीं चलाई जाएंगी। मगर, जिन इलाकों में कोहरा नहीं होगा और वहां स्पेशल ट्रेन चलाने की जरूरत महसूस हुई तो उन इलाकों में जरूरत के मुताबिक स्पेशल ट्रेन चलाई भी जा सकती हैं।
सूत्रों का कहना है कि, रेलवे हर साल कोहरे के मौसम में ट्रेन समय पर चले यात्रियों को कई दिक्कत नहीं हो। इसलिए बड़े स्तर पर तैयारियां करता है। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद कई बार कोहरे के प्रकोप के चलते ट्रेन लेट हो जाती है। ऐसे में इसका असर दूसरी ट्रेनों पर भी होता है। इनमें अधिकांश ट्रेनें उत्तर भारत समेत दिल्ली से प्रभावित अन्य जोन से संबंधित होती है। अगर एक जोन में कोहरे का असर पड़ता है तो दूसरे जोन की ट्रेनों में भी इसका असर दिखाई देता हैं, क्योंकि इस कारण अन्य जोन की ट्रेन भी कैंसिल या लेट हो जाती है।
कोहरे और प्रदूषण के समय दिल्ली और इसके आसपास में फैलने वाला स्मॉग भी रेलवे ऑपरेशन को काफी प्रभावित करता है। इस कारण जहां ट्रेनों की स्पीड कम करनी पड़ती है वहीं कुछ ट्रेनों को कैंसल भी करना पड़ता है। इसके अलावा नार्दर्न रेलवे के अलावा नॉर्थ-ईस्ट रेलवे, नॉर्थ-सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट रेलवे में कोहरा सबसे अधिक प्रभावित करता है। इनमें दिल्ली, लखनऊ, आगरा, जयपुर और वाराणसी डिवीजन समेत अन्य डिवीजन शामिल हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि, कोहरे और प्रदूषण के मौसम में रेलवे ने यह योजना बनाई है कि पहली प्राथमिकता पर रूटीन ट्रेनें ही समय पर चलाए जाए। इसलिए एक दिसंबर से स्पेशल ट्रेन नहीं चलाई जाएगी। लेकिन जिन क्षेत्रों में कोहरा नहीं होगा। वहां स्पेशल ट्रेनें चलाई जाने की जरूरत महसूस हुई तो उन क्षेत्रों में जरूरत को देखते हुए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएगी। वहीं, रेलवे ने यह भी प्लानिंग की है कि कोहरे के दौरान यात्रियों को कम-से-कम परेशानी हो। इसके लिए तमाम बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के खाने-पीने और बैठने के लिए लिए अतिरिक्त सुविधाएं मुहैया कराने की योजना तैयार कर ली गई है।