अगर रेलवे को स्टेशन से भीड़ कम करना है तो यात्रियों को सुविधा देनी होगी। जैसे एयरपोर्ट पर एक निश्चित सीमा के बाद पैसेंजर को छोड़कर अन्य लोगों को आगे जाने की अनुमति नहीं होती ठीक उसी तरह का एक मैकेनिज्म (तंत्र) रेलवे को तैयार करना होगा...
भारतीय रेलवे ने कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म टिकटों की कीमत तीन से पांच गुना तक बढ़ा दी है। प्लेटफॉर्म टिकट के दाम बढ़ाने के पीछे रेलवे ने कोरोना संक्रमण के चलते प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम करने का हवाला दिया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि प्लेटफॉर्म टिकट के दाम बढ़ाए जाने के बजाए रेलवे अपनी व्यवस्था में बदलाव कर स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रित कर सकता है।
प्लेटफॉर्म टिकट के दाम बढ़ाए जाने के बाद रेलवे ने सफाई भी दी है। रेलवे का कहना है कि स्टेशनों पर भीड़ का नियमन और नियंत्रण डीआरएम की जिम्मेदारी है। कोरोना वायरस के चलते स्टेशनों पर भीड़ कम करने के लिए रेलवे ने यह कदम उठाया है। प्लेटफॉर्म टिकट के दाम बढ़ाना एक अस्थाई कदम है जो यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
रेलवे के मुताबिक जमीनी स्थिति का आकलन करने के बाद समय-समय पर प्लेटफॉर्म टिकट शुल्क में वृद्धि की जाती है और इसकी जिम्मेदारी डीआरएम को सौंप दी गई है। लोगों की ज्यादा भीड़ रेलवे स्टेशनों पर न आए, इसलिए समय-समय पर प्लेटफॉर्म टिकट के दाम बढ़ाए जाते रहे हैं, ऐसा सिर्फ कुछ समय के लिए किया जाता है, इसमें कुछ भी नया नहीं है।
प्लेटफॉर्म टिकट दो घंटे के लिए वैध होता है। यदि आप रेलवे प्लेटफॉर्म पर अपने किसी संबंधी को छोड़ने या लेने जा रहे हैं तो प्लेटफॉर्म टिकट लेने के समयानुसार दो घंटे तक प्लेटफॉर्म पर रुकने की अनुमति मिलती है। इसके बाद जुर्माना देना पड़ सकता है।
भारतीय रेलवे ने पांच मार्च से प्लेटफॉर्म टिकट उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। यात्रियों को अब इसके लिए पहले से तीन से पांच गुना ज्यादा कीमत देकर प्लेटफॉर्म टिकट खरीदने होंगे। जो प्लेटफॉर्म टिकट 10 रुपये में उपलब्ध था, उसे दिल्ली के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर 30 रुपये देकर खरीदना होगा। इसी तरह मुंबई में भी प्लेटफॉर्म टिकट के दाम बढ़ चुके हैं। यहां एक प्लेटफॉर्म टिकट के 50 रुपये देने पड़ रहे हैं।