उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने अपना विवादित आदेश वापस ले लिया है। रेलवे ने इस आदेश पर सवाल उठने के कुछ ही घंटे बाद अपना आदेश वापस लेने का एलान किया। दरअसल, रेलवे ने इस आदेश में कहा था कि जूनियर अधिकारियों के कमरों में लगे एयर कंडिशनर्स (एसी) हटाए जाएंगे। कर्मचारियों ने काम के दबाव का भी जिक्र किया है। जानिए क्या है पूरा मामला
जूनियर अफसरों के कमरे से एसी हटाने के आदेश पर विवाद होने के बाद नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (एनसीआर) ने कुछ घंटे में अपना विवादित आदेश वापस ले लिया। खबर के मुताबिक 22 सितंबर यानी नवरात्र के दिन जारी आदेश की मूल प्रति में लिखा गया था कि एनसीआर के महाप्रबंधक (जीएम) के निर्देशानुसार सभी कनिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय कक्षों से एसी हटाए जाएं। आदेश की अनुपालन रिपोर्ट भी तुरंत भेजने का निर्देश दिया गया। खबरों के मुताबिक रेलवे ने इस आदेश को 'अत्यंत जरूरी' बताते हुए इसे तत्काल लागू करने का दबाव भी डाला।
क्या है विवादित आदेश, यूपी के इन राज्यों में हुआ पुरजोर विरोध
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उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने सोमवार को जो विवादित आदेश जारी किया इसके दायरे में आगरा, झांसी और प्रयागराज मंडलों के सभी कनिष्ठ पैमाने (जूनियर स्केल) अधिकारियों के कमरों से एयर कंडीशनर (एसी) तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए। पहले इस आदेश का मकसद अधिकारियों की फील्ड में उपस्थिति बढ़ाना बताया गया। हालांकि, इस फैसले का अधिकारियों ने कड़ा विरोध किया। विरोध और असंतोष बढ़ता देख रेलवे प्रशासन को कुछ ही घंटों में अपना आदेश वापस लेना पड़ा।
व्हाट्सएप ग्रुप में हुआ विरोध
एनसीआर रेलवे के इस आदेश का अधिकारियों ने अलग-अलग रेलवे व्हाट्सएप ग्रुप पर विरोध किया। उनका कहना था कि यह कदम कार्यकुशलता और मनोबल को कमजोर करेगा। इसके बाद जोन ने दूसरा आदेश जारी किया और पहले वाले आदेश को वापस ले लिया।
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विरोध करने वाले कर्मचारियों ने दी ये दलीलें
कई अधिकारियों ने गुमनाम रहने की शर्त पर कहा, कामकाज का परिवेश आरामदायक रहे तो उत्पादकता बेहतर होती है। ध्यान केंद्रित रखने के लिए भी यह जरूरी है। इन अधिकारियों ने कहा कि आदेश जारी कर केवल कनिष्ठ अधिकारियों को एसी की सुविधा से वंचित करना भेदभावपूर्ण है। ऐसा करने से असमानता की भावना पैदा होगी। कर्मचारी हतोत्साहित भी होंगे।
कर्मचारी अतिरिक्त दबाव में काम करने को मजबूर
कुछ अधिकारियों ने ऐसे विवादित आदेश जारी करने के औचित्य पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने रेलवे के वास्तविक मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा, सुरक्षा श्रेणी के विभागों में कई पद लंबे समय से खाली हैं। रेल परिचालन में निरंतर विस्तार हो रहा है, लेकिन स्वीकृत कर्मचारी संख्या बीते कई वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है। विरोध करने वाले खेमे का दावा है कि कर्मचारी अतिरिक्त दबाव में काम करने को मजबूर हैं।